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लावारिस पशु बने हादसों का सबब

Sun, 28 Aug 2016 12:50 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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लावारिस पशु बने हादसों का सबब - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर की सड़कों पर घूमते लावारिस पशु इन दिनों हादसों का सबब बने हुए हैं। शहर के मुख्य मार्गों, बाजारों के अलावा अंदर की गलियों में भी आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इससे पिछले कुछ महीनों में आवारा पशुओं की चपेट में आने से चार लोग घायल हुए हैं। इन सबके बीच नगर निकाय विभाग सिर्फ यह कहकर इतिश्री कर लेता है कि टेंडर हो चुका है। जल्द ही जमीनी काम दिखाई देगा।
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टेंडर प्रक्रिया फेल, आदमी परेशान
आवारा और बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए नगर परिषद रेवाड़ी में पिछले एक साल से ज्यादा समय से टेंडर प्रक्रिया चल रही है। बावजूद इसके योजना अभी तक जमीन पर नहीं उतर सकी। सड़कों पर आवारा और बेसहारा पशु कब्जा जमाए बैठे रहते हैं, लेकिन प्रशासन को यह सब नहीं दिखता। इसका खामियाजा सीधे तौर पर आम आदमी को उठाना पड़ता है। क्योंकि सड़क पर जमे पशु कभी जाम तो कभी हादसे का सबब बन जाते हैं।

कुछ गोशाला सक्रिय तो कुछ शांत
 शहर में ही सबसे प्राचीन गोशालाओं में से एक गोपालदेव चौक के पास स्थित महर्षि दयानंद गोशाला है, लेकिन इसका जमीनी काम न के बराबर ही दिखाई देता है। वहीं जाटूसाना स्थित शिवमोहन गोशाला भी सराहनीय योगदान दे रही है। करीब 6 एकड़ में बनी इस गोशाला में करीब 1400 गोवंश हैं। इसके अलावा खंडोड़ा के पास भी एक गोशाला है।
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बढ़ती जा रही हैं तस्करों की गतिविधियां
शहर ही नहीं जिले भर में आए दिन गायों की तस्करी की वारदात सामने आती हैं। इसका कारण बेसहारा पशुओं की सुरक्षा और उन्हें सही जगह पहुंचाने के लिए प्रशासन के पास कोई मास्टर प्लान नहीं है। जिसके चलते तस्कर बेरोक-टोक पशुओं की तस्करी की वारदातों को जिले में अंजाम देते हैं। पिछले साल भर की बात करें तो दो दर्जन से अधिक पशु तस्करी की वारदातें हुई हैं।

पशुपालकों की भी है बड़ी जिम्मेदारी
जिले में बड़ी तादाद में पशुपालक हैं। शहर की ही बात करें तो कई मोहल्लों में पशुओं को भारी संख्या में पाला जाता है। लेकिन इनमें से कई ऐसे पशुपालक हैं जो अपने दुधारू पशुओं खासकर गायों का दूध निकालकर उन्हें चरने के लिए खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में शहर में पहले से ही घूम रहे बेसहारा पशुओं की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में ये जिले और खासकर शहर के पशुपालकों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अगर दुधारू पशुओं को अपने फायदे के लिए पालें तो उनके चारे और रहने का इंतजाम भी खुद करें।
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नगर परिषद की ओर से बेसहारा गायों और आवारा पशुओं को शहर से गोशाला में भेजने का काम करना चाहिये। गोशाला की ओर से जो सहयोग जब चाहिये मिलेगा।
रमेश वशिष्ठ, प्रेस सचिव, शिवमोहन गोशाला
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हाल ही में नगर परिषद में पदभार ग्रहण किया है। जल्द ही शहर से बेसहारा और आवारा पशुओं को बाहर गोशाला में भेजने का काम किया जाएगा।
-मनोज यादव, ईओ, नगर परिषद
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