रजिस्ट्रेशन टैक्स बढ़ाए जाने के विरोध में सोमवार को एंबुलेंस चालकों ने हड़ताल शुरू कर दी। ऐसे में मरीजों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के पास 17 और कुछ निजी अस्पतालों के पास खुद की एंबुलेंस होने से मरीजों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई। जिन्हें जरूरत पड़ी, उन्होंने निजी वाहनों से दूसरे अस्पताल तक पहुंचाया गया।
एंबुलेंस वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाती तब तक हड़ताल खत्म नहीं होगी। एंबुलेंस मालिक मरीजों को परेशान नहीं करना चाहते लेकिन हड़ताल उनकी मजबूरी है। जिले में 32 एंबुलेंस ऑपरेटर हैं, जो हड़ताल के दौरान गढ़ी बोलनी रोड स्थित कार्यालय में बैठे रहे।
आश्वासन मिला और फिर जारी कर दिए आदेश
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष कुलदीप यादव का कहना है कि 2011 में पूर्व की सरकार ने एंबुलेंस पर रजिस्ट्रेशन टैक्स एक से बढ़ाकर 6 फीसदी कर दिया था और एक नया पीजीटी गुड्स टैक्स लगाया था, जिसका कोई नोटिफिकेशन एंबुलेंस संचालकों को नहीं मिला। अब मौजूद सरकार ने जून, 2015 को इस टैक्स को भरवाने के लिए अधिकारियों को आदेश दे दिए। इसे लेकर कई बार अधिकारियाें व मंत्रियों से मिला गया। आश्वासन भी मिला लेकिन अब एक बार फिर यह आदेश दोबारा जारी किया गया है, जिसे किसी भी सूरत में नहीं माना जाएगा। इस दौरान ईश्वर यादव, बंसी यादव, सुनील यादव, अतर यादव, विक्रम यादव सहित अनेक ऑपरेटर मौजूद रहे।
यह है मांगे:
1. एंबुलेंस पर जो नया पीजीटी गुड्स टैक्स लगाया गया, वह 2011 से पूरी तरह माफ किया जाए।
2. रजिस्ट्रेशन टैक्स एक से बढ़ा छह फीसदी किया गया, वह भी 2011 से एक फीसदी ही किया जाए।
3. दिल्ली की तर्ज पर एंबुलेंस की फिटनेस की समय सीमा 13 साल लागू की जाए।