रेवाड़ी। मनेठी एम्स के लिए प्रस्तावित जमीन
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मनेठी एम्स के निर्माण को लेकर जारी विवाद में एक बार फिर संघर्ष समिति के सुर बदलने लगे हैं। दो दिन पूर्व रेवाड़ी में पत्रकार वार्ता में प्रदेश के वन एवं लोकनिर्माण मंत्री राव नरबीर के प्रस्तावित जमीन को लेकर दिए बयान पर समिति ने कड़ा ऐतराज जताया है। समिति ने कहा कि वन मंत्री अपने अधिकारियों के साथ समिति के साथ बैठकर ये साबित करें कि यह जमीन वन विभाग की है तो हम चुप बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के पास जमीन से संबंधित सभी प्रमाण हैं। ऐसे में मंत्री को लोगों के हितों को देखते हुए ऐसे बयान नहीं देने चाहिए, जिससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के वन एवं लोकनिर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह ने शुक्रवार को शहर के विश्रामगृह में एक सवाल के जवाब में कहा था कि मनेठी एम्स के लिए दी गई जमीन वन विभाग की है। हालांकि उन्होंने कहा था कि एम्स के लिए सरकार प्रयासरत है, लेकिन मंत्री के बयान के बाद एम्स संघर्ष समिति ने कड़ा ऐतराज जताया है।
पहले राव इंद्रजीत सिंह फिर राव नरबीर और अब.....
बता दें कि एम्स निर्माण को लेकर संघर्ष समिति नेे शुरुआत से ही केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह के भरोसे आंदोलन को आगे बढ़ाया था। समिति के सदस्यों का कहना था कि राव इंद्रजीत ही एम्स के लिए केंद्र में पैरवी कर रहे हैं। लेकिन एम्स के निर्माण में एफएसी की रुकावट के बाद राव इंद्रजीत के मनेठी नहीं तो जिले में ही बनेगा एम्स के बयान के बाद समिति के सदस्य भड़क गए। इसके बाद समिति सदस्य पाला बदलते हुए राव के धुर विरोधी प्रदेश के वन मंत्री राव नरबीर के पास चले गए। हालांकि मुख्यमंत्री की आशीर्वाद यात्रा के दौरान भी समिति सदस्यों ने ठोस पैरवी की थी। लेकिन शुरुवार को वनमंत्री द्वारा पत्रकार वार्ता में दिए बयान के बाद समिति के सुर एक बार फिर बदलने लगे हैं।
समिति के सामने बैठकर साबित करें मंत्री : समिति
एम्स संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं मनेठी के सरपंच श्योताज यादव ने यह जमीन ग्राम पंचायत की है। पंचायत ने पौधरोपण के लिए तीन साल के लिए यह जमीन वन विभाग को दी थी। ग्राम पंचायत के पास इसके सभी प्रमाण हैं। लेकिन वन विभाग के पास ऐसा भी कोई प्रमाण नहीं है कि जमीन उसकी है। इसके अलावा यहां अभी तक कोई पौधरोपण भी नहीं हुआ है। समिति अध्यक्ष ने कहा कि मंत्री से उन्हें काफी उम्मीदें हैं। लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए उन्हें ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।
एम्स निर्माण को एफएसी ने किया नामंजूर
मनेठी एम्स का बजट अलॉट होने के बावजूद भी इसके निर्माण को रोक दिया गया। केंद्रीय वन सलाहकार समिति ने इसके निर्माण को नामंजूर करते हुए कहा था कि यह वन आरक्षित भूमि है। ऐसे में यहां निर्माण संभव नहीं है।