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एम्स संघर्ष समिति ने खारिज की रिपोर्ट

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ग्रुरूग्राम में वन मंत्री राव नरबीर सिंह ने मुलाकात करते हुए एम्स संघर्ष समिति मनेठी के सदस्य। - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। मनेठी में प्रस्तावित एम्स के निर्माण वन सलाहकार समिति की नामंजूरी के बाद से मचे घमासान के बीच दो दिन पहले एम्स संघर्ष समिति को वन सलाहकार समिति की रिपोर्ट मिली है। रिपोर्ट में जिन दो कारणों का हवाला देकर निर्माण को नामंजूर किया गया है उस पर समिति के लोगों ने सवाल खड़े किए है। रिपोर्ट को देखकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारिक रूप से कहीं न कहीं घालमेल तो अवश्य हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि यह सब किसके इशारे पर किया जा रहा है। उधर, संघर्ष समिति के सदस्य रविवार को वन एवं लोकनिर्माण मंत्री राव नरबीर सेे भी मिलकर जमीन से संबंधित कागजात दिखाए।
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बावल विधानसभा क्षेत्र के गांव मनेठी में प्रस्तावित एम्स के निर्माण की प्रक्रिया को केंद्रीय वन सलाहकार समिति की नामंजूरी के बाद क्षेत्र के लोगों बड़ा झटका लगा है। लोगों ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाते हुए केंद्रीय मंत्री से लेकर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री तक के दरबार में हाजिरी लगानी शुरू कर दी है, लेकिन इस सबके बीच दो दिन पूर्व ही संघर्ष समिति के लोगों को वन सलाहकार समिति की रिपोर्ट की कॉपी मिली।
इन दो कारणों से किया नामंजूर
कारण-एक
मनेठी एम्स के निर्माण स्थल को दिल्ली-जयपुर हाईवे नंबर आठ से करीब तीस किलोमीटर दूर दिखाया गया है, जबकि एम्स निर्माण स्थल हाईवे नंबर आठ की बजाए हाईवे नंबर 11 पर स्थित है। अधिकारियों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में हाईवे नंबर 11 को कोई जिक्र नहीं किया गया है। यह जमीन हाईवे नंबर 11 पर स्थित है। इसलिए इस कारण को समिति सदस्य सिरे से खारिज करते हैं।
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कारण-दो
जिस स्थान पर एम्स का निर्माण कराया जाना है वन सलाहकार समिति की रिपोर्ट में इसे वन आरक्षित क्षेत्र बताया गया है। जबकि आरक्षित घोषित किए जाने के बाद से ही यहां वन दूर तक भी नहीं है। इस स्थान पर झाड़ियों के छोटे-मोटे पेड़-पौधे खड़े हुए है। ऐसे में इसे वन आरक्षित बताना भी बड़ा सवाल है। समिति सदस्य उपायुक्त के सामने भी प्रमाण पत्रों के साथ अपना पक्ष रख चुके है। ऐसे में इस ऑब्जेक्शन को भी खारिज किया जाता है।
क्या यह अधिकारियों की चूक है
वन सलाहकार समिति द्वारा लगाए गए ऑब्जेक्शन पर सवाल उठने लगे है। एम्स संघर्ष समिति भी उपायुक्त के सामने वन अधिकारियों पर सवाल खड़े कर चुकी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या वन सलाहकार समिति को गलत रिपोर्ट देना अधिकारिक चुक थी या फिर किसी के इशारे पर की गई कार्रवाई थी। यह जांच का विषय है।
शुरू से ही हो रही है मनेठी एम्स में राजनीति
मनेठी में प्रस्तावित एम्स के निर्माण को लेकर शुरू से ही राजनीति की जा रही है। राजनेताओं ने इसे जनभावनाओं की बजाए वोट बैंक से जोड़कर देखा है। घोषणा के कुछ समय बाद ही मुख्यमंत्री ने इंकार कर दिया था। इसी बीच प्रदेश का एक कैबिनेट मंत्री ने इसके निर्माण पर सवाल उठाया था। हालांकि ग्रामीणों के लंबे संघर्ष के बाद इसे स्वीकृति मिल गई थी। लेकिन अब एक बार फिर से एम्स का निर्माण लटक गया है।
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