बावल के प्राणपुरा में चल रहे जाट आंदोलन धरने के तीसरे दिन राजस्थान जाट महासभा ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर बावल के जाटों को अपना समर्थन दिया। जाट आदर्श महासभा के अलवर जिलाध्यक्ष बलदेव छिल्लर एवं अन्य पदाधिकारी मंगलवार को प्राणपुरा पहुंचे। इसी के साथ रेवाड़ी के अन्य जाट गांवों के प्रतिनिधि भी बावल में अपना समर्थन देने के लिए पहुंचे। समर्थन देने पहुंचने वाले जाट नेताओं ने बावल के जाटों को आर्थिक सहयोग भी देने का आश्वासन दिया है।
गौरतलब है कि राजस्थान में भी जाटों को आरक्षण दिलाने के लिए चले आंदोलन में राजस्थान आदर्श जाट महासभा ने अहम रोल निभाया था। इधर जाट नेता एवं जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला महासचिव जीतराम लौर ने कहा कि सरकार जब तक उनकी सभी मांगों को नहीं मानेगी आंदोलन चलता रहेगा। युवाओं को धरने से दूर रखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रदेश स्तरीय कमेटी ने आंदोलन को जरूरत पड़ने तक सीमित एवं युवाओं को दूर करने का निर्णय लिया हुआ है। यदि आवश्यकता पड़ी तो युवाओं के साथ सभी जाट एक मंच पर आकर अपनी लड़ाई लडेंगे।
दिनभर पुलिस-प्रशासन लगाता रहा चक्कर
मंगलवार को प्राणपुरा बस स्टैंड पर विशाल बरगद के पेड़ी की छाया में जाट आंदोलनकारी तास खेलते हुए हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे। धरना स्थल से 100-100 मीटर की दूरी पर तीनों ओर पुलिसकर्मी तैनात हैैं। इसी के साथ जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम, डीएसपी एवं तहसीलदार भी हर घंटे बाद राणौली ट्रैक पर पहुंचकर तैनात सुरक्षा बलों से धरने की सुचनाएं जुटा रहे हैं। जाट आंदोलनकारियों ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी थोड़ी-थोड़ी देर बाद धरना स्थल के सामने से गुजर रहे हैं। जानकारी के अनुसार कोई भी पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी आंदोलनकारियों ने मुलाकात करने नही पहुंचा।
रेवाड़ी के इन गांव से भी मिला बावल के जाटों को समर्थन
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला महासचिव जीतराम लौर ने बताया कि मंगलवार को रेवाड़ी के अनेक गंाव के जाट नेताओं ने धरने पर पहुंचकर उन्हें समर्थन दिया। जीतराम ने बताया कि माजरी से जिलेसिंह, माजरा से रामकुमार, लाला से वेदजांगु, एवं लिसाना सहित अनेक गांवों के लोगों ने यहां पहुंचकर समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन को सीमित रखा गया है, लोग फोन कर उनसे आंदोलन में भाग लेने की बात कर रहे हैं।
गर्मी से पुलिस कर्मी बेहाल
नाप नहीं छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गर्मी के कारण पुलिस कर्मियों का बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि सोमवार को गर्मी की तपस के कारण दो पुलिसकर्मी बेहोश हो गए। इनको बाद में उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इधर रात के समय भी पुलिस कर्मियों को आंदोलनकारियों के साथ-साथ मच्छरों से दो-दो हाथ करने पड़ रहे हैं। पुलिस कर्मियों का मानना है कि जब रात के समय धरने पर ही लोग नहीं रहते तो ड्यूटी का क्या मतलब बनता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उच्च अधिकारियों के निर्देशों का पालन तो हर हाल में करना ही पड़ता है।