शहर के बाराहजारी स्थित वृंदावन चौक का प्राचीन जगन्नाथ मंदिर। स्त्रोत : पुजारी
रेवाड़ी। शहर में इस बार 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी। यह संयोग 148 वर्ष बाद बना है जब 16 जुलाई को यह यात्रा निकाली जाएगी। शहर में पहली बार भगवान जगन्नाथ रथयात्रा 16 जुलाई 1878 को निकाली गई थी।
शहर के बारा हजारी स्थित वृंदावन चौक के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी यह यात्रा पिछले 148 वर्षों से लगातार जारी है। मंदिर के संचालक पंडित टेकचंद स्वामी ने बताया कि पहली रथयात्रा के लिए 7 जुलाई 1878 को अनुमति और लाइसेंस मिला था।
16 जुलाई 1878 को अंग्रेज अधिकारी मिस्टर ब्रेन ने मोती चौक स्थित द ब्रेन कोआपरेटिव सोसाइटी से इस यात्रा का अवलोकन किया था। इस ऐतिहासिक यात्रा से रेवाड़ी के पहले प्रवेश द्वार का भी संबंध है। भगवान जगन्नाथ के नाम पर बने जगन द्वार को बाद में जगन गेट के नाम से जाना जाने लगा। नगर भ्रमण के बाद भगवान जगन्नाथ का रथ इसी मार्ग से शहर में प्रवेश करता था।
पंडित टेकचंद ने बताया कि डेढ़ सौ वर्षों में कई कठिन परिस्थितियां आईं लेकिन यात्रा कभी नहीं रुकी। वर्ष 1947 की परिस्थितियों, आपातकाल, 1984 के दंगों और कोरोना काल में भी यह परंपरा कायम रही।
14 से 16 जुलाई तक मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। भजन-कीर्तन के साथ नगर भ्रमण के दौरान विभिन्न स्थानों से आई शहनाई, ढोल, ताशा, नगाड़ा और गतका पार्टियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।