रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विकास गुप्ता की अदालत ने छीना-झपटी के एक मामले में संदेह का लाभ देते हुए आरोपी बेरी का बास निवासी आजाद खान को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका। शिकायतकर्ता ज्वाला आरोपी आजाद की पहचान नहीं कर सका जिससे केस कमजोर हो गया।
रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बाद भई पुलिस ने कोई फुटेज नहीं जुटाई। इस लापरवाही को अदालत ने गंभीर माना। पहचान परेड नहीं कराने को भी अदालत ने कमी बताया। कोर्ट ने कहा कि जब शिकायतकर्ता आरोपी को पहचान नहीं पाया तो परेड कराना जरूरी था।
पुलिस ने आजाद के कब्जे से बैग और 500 रुपये बरामद करने का दावा किया लेकिन शिकायतकर्ता ने अपने बैग की पहचान नहीं बताई थी। न ही बरामद रकम के नोटों का कोई विवरण दिया गया। ऐसे में बरामदगी को आजाद से जोड़ना संभव नहीं हो पाया।
बरामदगी और अन्य कार्रवाई के दौरान कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया गया। दस्तावेजों पर भी केवल शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर पाए गए और वह भी पुलिस स्टेशन में किए गए थे।
20 मार्च को सुनाए फैसले में सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने कहा कि संदेह से परे अपराध साबित नहीं हो सका। इसके चलते आजाद खान को आरोपों से बरी कर दिया गया।