रेवाड़ी। एचएमपीवी (ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस) से बचाव के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ चुका है। मंगलवार को ही स्वास्थ्य मंत्री ने जिला सिविल सर्जन को एडवाइजरी जारी की थी। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बुधवार से एडवाइजरी पर अमल करना शुरू कर दिया गया है।
विभाग की तरफ से संदीप लक्षण के मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू की जा चुकी है। साथ ही फ्लू कार्नर भी बनाया जाएगा। यहां फ्लू कार्नर के लिए नामित स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त संख्या में दवा, उपकरण, आक्सीजन तथा वेंटिलेटर एवं प्रशिक्षित कर्मचारियों की ड्यूटी लगातार रोटेशन में लगाई जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री से मिले निर्देश के मुताबिक ओस्टेलमाविर 75, 45, 30 मिलीग्राम और सिरप के साथ-साथ पीपीई, एन-95 मास्क, अभिकर्मक किट व वीटीएम आदि की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। जिला स्वास्थ्य अधिकारी इन स्पेशल केंद्रों में मौसमी इन्फ्लूएंजा और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के लिए समर्पित बिस्तर सुनिश्चित करेंगे। वहीं, बुजुर्गों, बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इन्फ्लूएंजा, एचएमपीवी, आरएसवी एवं सांस से संबंधी अन्य बीमारियों के इलाज के लिए उचित प्रबंध किए जा रहे हैं। जिले में इस वायरस का अभी तक कोई भी मामला सामने नहीं आया है।
मामले ज्यातार ठंड के मौसम में देखे जाते हैं
इस बीमारी को पहली बार 2001 में खोजा गया था। इसके मामले ज्यातार ठंड के मौसम में देखे जाते हैं। पैरामाइक्सोविस्डेि और रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (आरएसवी) से संबंधित यह वायरल रोगजनक सभी आयु वर्ग के लोगों में सांस संबंधी बीमारियों का कारण बनता है। एचएमपीवी खांसने या छींकने से निकलने वाली रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स के साथ-साथ दूषित सतहों को छूने या संक्रमित व्यक्तियों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस सांस लेने में हल्की असुविधा से लेकर गंभीर बीमारियों का कारण खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में बनता है।
एचएमपीवी के लिए नहीं है कोई टीका उपलब्ध
बता दें कि वर्तमान में एचएमपीवी के लिए कोई खास एंटी वायरल दवा या टीका उपलब्ध नहीं है। हल्के मामलों में आराम करने और शरीर को हाइड्रेट रखने से राहत मिल जाती है। बुखार और नाक बंद को नियंत्रित करने के लिए सामान्य दवाएं पर्याप्त हैं। गंभीर मामलों में विशेष रूप से निमोनिया या ब्रॉकियोलाइटिस से पीड़ित रोगियों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है। वहीं, एचएमपीवी के हल्के मामले आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर एक सप्ताह तक चलते हैं। गंभीर मामलों में, बेहतर महसूस करने में अधिक समय लग सकता है।
जो गाइडलाइन मिली है उसी हिसाब से सुविधाओं को दुरुस्त करवाना शुरू कर दिया गया है। फिलहाल डरने की जरूरत नहीं है। बस स्वास्थ्य का ध्यान रखना इसमें अहम है। किसी प्रकार की कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
डॉ. अशोक कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन