संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सिविल अस्पताल में 5 बेड का वार्ड तैयार किया है। सीएचसी स्तर पर 5-5 बेड लगवाए हैं। इस सीजन में अभी तक डेंगू के 5 मरीज मिले हैं। घरों में मच्छरों का लार्वा मिलने पर 200 लोगों को नोटिस थमाया जा चुका है।
बचाव के लिए जिले की हर सीएचसी को 50-50 मच्छरदानियां दी गई हैं। हेल्थ इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि 500 मच्छरदानियों का स्टॉक उपलब्ध है। जरूरत पड़ी तो और भी मंगवाई जाएगी। सिविल अस्पताल में एलाइजा टेस्ट शुरू हो गया है। जिन लोगों में लक्षण लगते हैं, उनका एलाइजा टेस्ट कराया जा रहा है।
रैपिड फीवर सर्वे के दौरान उन इलाकों पर खास फोकस रहेगा, जहां पर पिछले वर्ष ज्यादा केस मिले थे। उन जगह लोगों को डेंगू फीवर के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।
बुखार पीड़ितों की स्लाइड भी तैयार होगी। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. अमित यादव के नेतृत्व में गठित टीमें जिला के ग्रामीण इलाकों में कूलर, गमलों, छोटे तालाब में लार्वा की जांच कर रही हैं। टीम में हेल्थ इंस्पेक्टर बिरेंद्र यादव और मलेरिया विभाग के सभी बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डेंगू और मलेरिया के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और बरसात के मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है। मलेरिया के लक्षण मच्छरों के काटने के 6 से 8 दिन बाद शुरू होते हैं। इसमें ठंड लगकर बुखार का आना और बुखार के ठीक होने पर पसीना आना, थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पेट की परेशानी डेंगू के लक्षण हैं।
डेंगू के पांच साल के आंकड़े
जिले में वर्ष 2018 में डेंगू के 82, 2019 में 27, 2020 में 39 व वर्ष 2021 में 306, 2022 में 324, 2023 में 406, 2024 में 421 व इस वर्ष 5 मरीज सामने आ चुके हैं। इसी तरह मलेरिया के वर्ष 2018 में 13, वर्ष 2019 में 8, वर्ष 2020 में 2 और वर्ष 2021 में 1, 2022 में 3 और 2023 में 9, 2024 में 8 व इस वर्ष एक भी मामला सामने नहीं आया हैं।
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वर्जन
घरों में लार्वा मिलने पर अबतक 200 लोगों को नोटिस थमाया जा चुका है। मानसून आने से पहले स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में जाकर लोगों जागरूक कर रही हैं। -डॉ. अमित यादव, नोडल अधिकारी, डेंगू एवं मलेरिया।