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खेड़ा बॉर्डर के धरनास्थल पर पहुंचा 500 किसानों का जत्था

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खेड़ा बॉर्डर के धरनास्थल पर किसानों को संबोधित करते किसान वक्ता। - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के किसान दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर पिछले 192 दिन से धरना पर बैठे हुए हैं। वीरवार को धरनास्थल पर राजस्थान के विभिन्न जिलों से 500 से अधिक किसानों का एक जत्था पहुंचा। किसानों ने कहा कि जब तक तीनों कृषि कानून रद्द नहीं होंगे, वे किसी भी सूरत में नहीं लौटेंगे।
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बता दें कि दिल्ली कूच करते समय हरियाणा पुलिस ने राजस्थान के किसानों को दिल्ली-जयपुर स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर अपना पड़ाव डाल दिया। वीरवार को धरनास्थल पर कोटा, बूंदी, जोधपुर, हनुमानगढ़ व जयपुर जिलों से 500 से अधिक किसानों का एक जत्था पहुंचा। अचानक किसानों की संख्या बढ़ने से पुलिस प्रशासन भी अलर्ट हो गया। धरनास्थल पर लंबे समय बाद लंगरों की संख्या भी बढ़नी शुरू हो गई है।
किसानों को संबोधित करते हुए राजाराम मील व अमराराम ने कहा कि फसलों की कटाई एवं तेज गर्मी व धूप के कारण किसान अपने घरों में थे। लेकिन अब किसान घरों से निकलकर आंदोलन स्थलों की ओर जाने लगे हैं। किसान एक बार फिर जिद्दी केंद्र सरकार को जगाने का प्रयास करेगा और आंदोलन को तेज गति देगा। उन्होंने कहा कि केंद्र व हरियाणा प्रदेश की सरकारें किसानों के आंदोलन को किसी न किसी बहाने बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन किसान अनुशासित ठग से आंदोलन को चला रहे हैं। केंद्र सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने पर विचार नहीं कर रही है, बल्कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए लोगों को आपस में लड़ाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ये तीनों कृषि कानून देश के किसानों को बर्बाद करने वाले हैं। इसलिए केंद्र सरकार को बिना समय गवाए इन्हें रद्द कर देना चाहिए। इस अवसर पर रामकिशन महलावत, रणजीत राजू, ईश्वर महलावत व नवीन कुमार सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
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