रेवाड़ी। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर बनाए गए अवैध कटों को बंद करने के बाद भी दुपहिया वाहन चालक अवैध रूप से डिवाइडर फांद कर हाईवे पार कर रहें है। लोगों द्वारा लिया जाने वाला यह शार्टकट उनकी जिंदगी के साथ ही दूसरों के जीवन को भी खतरे में डाल रहा है। हाईवे पर जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर से कापड़ीवास गांव केे बीच करीब 35 किमी के क्षेत्र में वाहन चालकों ने 16 अवैध प्वाइंट बनाए हुए है, जिन्हें वाहन चालक शार्टकट के लिए इस्तेमाल करते है। जिले में फरवरी माह भर में अब तक 19 की मौत व 50 लोग घायल हो चुके है। हाईवे पर करीब एक दर्जन कट थे जिन्हें एनएचएआई ने बंद कर दिया था, जिससे लोगों को करीब 3 से 5 किमी घूम कर यात्रा करनी पड़ती है।
पुलिस चौकी के सामने हाईवे फांदते है चालक
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर कई स्थानों पर तो पुलिस सहायता बूथों के सामने की वाहन चालक डिवाइडर फांद कर हाईवे पार करते हैं। इस दौरान कई बार हादसे भी हो चुके है। पुलिस कर्मी के वाहन चालकों को रोकते है और न ही उनका चालान करते हैं।
सुरक्षा के लिए लगवाए जाली
अवैध प्वाइंटों को बंद कराने के लिए पुलिस को सख्ती से काम लेना पड़ेगा साथ ही एनएचएआई को इन स्थानों पर जाली लगवानी चाहिए। जिससे लोगों का आवागमन बंद हो सके।
तीन साल में 597 लोगों की मौत व 1078 घायल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में 289, वर्ष 2018 में 299 तथा 2019 में अब तक 19 व्यक्तियों की सड़क दुघर्टना में मौत हो चुकी है तथा वर्ष 2017 में 553, वर्ष 2018 में 495 तथा 2019 में अब तक 50 व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल हुए है।
यहां बनाए है अवैध प्वाइंट
हाईवे पर जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर, ओढ़ी कट, सांजरपुर गांव, नैचाना कट, बनीपुर चौक, आसलवास, मसानी के समीप, निखरी, खरखड़ा, धारूहेड़ा थाना के सामने, धारूहेड़ा पुल के समीप, मालपुरा, कापड़ीवास, नारनौल रोड के साथ ही एनएच 71 पर भी एक दर्जन से अधिक शार्टकट बनाए गए है।
27 फरवरी को दिए थे बंद करने के आदेश
उपायुक्त ने 27 फरवरी को जिले में बढ़ रहे हादसों पर लगाम के लिए इस प्रकार के प्वाइंटों को जल्द से जल्द बंद करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद भी सड़कों पर बनाए गए इन कटों को बंद नहीं कराया गया है।
लोगों ने अपनी व्यवस्था के अनुसार कट बनाए हुए है। पुलिस की ओर से ऐसे सभी कटों को बंद कराया जा रहा है। इसके बाद भी यातायात नियमों को तोड़नेे वालों के चालान किए जाते है। इसके लिए लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है।
नीरज कुमार, एसएचओ ट्रैफिक।