अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। किसान कागजी कार्रवाई से परेशान जरूर हैं, लेकिन उनकी सुनवाई होने लगी है। रेवाड़ी के इतिहास में यह पहला मौका है, जब मात्र पांच दर्जन किसानों के हंगामे पर उपायुक्त ने न केवल हैफेड के अधिकारियों को तुरंत बुलाकर रात को ही खरीद करने के निर्देश दिए, बल्कि एसडीएम जितेंद्र कुमार को भी वहां ड्यूटी पर तैनात रखा। उपायुक्त के कड़े निर्देश पर रात करीब 11 बजे खरीद शुरू की। जो रविवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे तक चली। शनिवार को हैफेड ने 9700 क्विंटल बाजरे की खरीद की। सुपरविजन के लिए एसडीएम जितेंद्र कुमार को नियुक्त किया गया।
बताते चलें कि इससे पहले बेशक किसानों ने खरीद के ही सिलसिले में रोड तक जाम किया, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। इधर राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि सरकार किसानों को नाखुश नहीं करना चाहती है, इसीलिए पहली बार रात के समय बाजरे की खरीद कराई गई है।
बाजरे की खरीद एक अक्तूूबर से शुरू हुई थी। पांच दिन रोस्टर के हिसाब से किसान मंडी में आए और इसके बाद अर्थात शनिवार को ओपन में किसान अपनी आवक लेकर मंडी में पहुंचे। सूत्रों की मानें तो गत दिवस मंडी में 80 गांवों के किसान आए थे, जिससे वहां काफी भीड़ हो गई थी। हैफेड ने रात आठ बजे तक दो फड़ पर आया बाजरा खरीदने के बाद तीसरे फड़ वाले किसानों को सोमवार को बुलाया था। किसानों ने अपनी परेशानी का हवाला देकर हैफेेड अधिकारियों से उनकी आवक खरीदने का आग्रह किया, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। हैफेड के अधिकारियों की मनमानी व अपनी परेशानी लेकर किसानों ने उपायुक्त निवास पर पहुंचकर हंगामा कर दिया। हंगामा करने वालों में लगभग 60 किसान शामिल थे। किसानों के हंगामे पर उपायुक्त ने हैफेड के अधिकारियों को मौके पर बुलाया और उनसे बाजरे की खरीद करने के निर्देश दिए। हालांकि एक बारगी हैफेड अधिकारियों ने खरीद करने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में अंजाने डर व उपायुक्त के कड़े निर्देश पर करीब 11 बजे उन्होंने खरीद शुरू की। खरीद रात करीब साढ़े तीन बजे तक चली। शनिवार को हैफेड ने 9700 क्विंटल बाजरे की खरीद की। सुपरविजन के लिए एसडीएम जितेंद्र कुमार को नियुक्त किया गया।
आखिर क्यों की गई देर रात तक बाजरे की खरीद
राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि चुनाव का आ रहा है। सरकार किसानों को नाराज नहीं करना चाहती है। इसका उदाहरण यह भी है कि इस बार बाजरे के भाव में अप्रत्याशित वृद्धि की गई है। इस वृद्धि को सरकार ने कैश कराने के लिए बाजरा रैली भी की और अब रात को बाजरे की खरीद भी कराई।
रात आठ बजे तक दो फड़ का बाजरा खरीदा जा चुका था। बिना रोस्टर के करीब 60 गांवों के किसान आ गए थे। गहमा-गहमी हो गई थी, इसलिए अगले दिन के लिए किसानों को बोला गया था, लेकिन वे नहीं मानें। बाद में उपायुक्त के आदेश पर रविवार अलसुबह 3.30 बजे तक खरीद करनी पड़ी। रविवार को खरीद नहीं होने के कारण कट्टों का उठान कराया जा रहा है।
नीरज त्यागी, महाप्रबंधक हैफेड