अमर उजाला ब्यूरो
धारूहेड़ा।
सरकार और विभाग भले ही जनता को बेहतर परिवहन सुविधा देने के दावे और वायदे कर रही हो, लेकिन उनके दावों और वायदों की हकीकत जाननी हो तो कभी धारूहेड़ा बस स्टैंड का रुख कर लीजिए। कहने को तो धारूहेड़ा का औद्योगिक क्षेत्र में जाना-माना नाम है, लेकिन यहां किस तरह की सुविधाएं मिल रही है ये सब आपके सामने है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ स्थित करीब सात एकड़ में बने धारूहेड़ा बस स्टैंड की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है। यहां न पीने को पानी है और न ही बैठने-रुकने की सही जगह। बस स्टैंड की इमारत भी जर्जर हालात में है। ऐसे में यहां कोई बसें ही नहीं जाती, जिससे मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति बन जाती है। बारिश के दिनों में तो यहां पानी भरने से स्विमिंग पूल बन जाता है।
तीन दशक पहले दस लाख की राशि से बना बस अड्डा की इमारत अब खंडहर में बदल गई है। बारिश के दिनों में पानी भर जाता है। इस संबंध में पिछले दिनों धारूहेड़ा बस स्टैंड के इंचार्ज सुभाष चंद ने 24 घंटे में पानी निकालने का आश्वासन दिया था। लेकिन एक माह बीतने के बाद भी अभी तक यहां से पानी नहीं निकल सका है।
अंदर नहीं जाती बसें
शहर के बस स्टैंड को भी सुचारु रूप से चलाने के लिए कुछ समय पहले दिल्ली से आने वाली बसों के लिए बस स्टैंड के अंदर जाना अनिवार्य कर दिया गया था। उस समय ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था न होने के कारण थाना के पुलिस कर्मी और होमगार्ड ही राजमार्ग पर खडे़ होकर बसों को अंदर की राह दिखाते थेे। सीधे जाने वाले वाहनों पर कड़ी कार्रवाई होती थी। लेकिन अब स्थिति पहले की तरह हो गई है। गिनी-चुनी बसों को छोड़कर सभी सीधे चली जाती हैं, जिससे यात्रियों को बड़ी परेशानी होती है। बस स्टैंड परिसर में अवैध रूप से रात समय वाहन खड़े रहते हैं। वहीं यहां चारों तरफ कचरा फैला है।
शराबियों के लिए बना ठिकाना, विधायक का आश्वासन, हालात के जस के तस
यहां के शौचालय तथा लगभग 8 एकड़ का परिसर लावारिस जानवरों की आरामगाह बन गया है। बस अड्डे की टूटी-फूटी इमारत जुआ खेलने वाले असामाजिक तत्वों एवं शराबियों का ठिकाना बन गई है। देर रात तक शराबी नशे में धुत्त होकर उत्पात मचाते रहते हैं। बस अड्डे के पास सब बस डिपो के लिए आरक्षित रखी पांच एकड़ जमीन पर भी लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। लोग मवेशियों को यहां बांधते हैं। बस स्टैंड की बदहाल स्थिति को देखते हुए विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने शीघ्र इसके जीर्णोद्धार का आश्वासन दिया था। लेकिन हालात जस के तस हैं।
तीन दशक पूर्व कर्नल राम सिंह ने करवाया था निर्माण
लगभग तीन दशक पूर्व तत्कालीन परिवहन मंत्री कर्नल राम सिंह ने इस बस अड्डे का निर्माण कराया था, जिससे दर्जनों गांव तथा राजस्थान का निकटवर्ती औद्योगिक कस्बा भिवाड़ी लाभांवित हुए थे। तीन दशकों के दौरान इस बस अड्डे की न तो मरम्मत की गई तथा न ही इसकी देखरेख करने के लिए परिवहन विभाग ने इसे संभाला।
बस स्टैंड के हालात बहुत बुरे हैं। आज तक किसी ने भी कोई सुध नही ली। शहर के विकास की बात सब करते है लेकिन शहर में मुख्य द्वार पर स्थित बस स्टैंड ही शहर का विकास अपने आप सब कुछ बता देता है। -मुकेश शर्मा
बस स्टैंड जर्जर हालात में है। झाड़ियां खड़ी हैं, असामाजिक तत्व प्रवेश करते रहते हैं। यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में बस स्टैंड में बसें ही नहीं आती। -धीरज सैनी, अध्यक्ष, धारूहेड़ा युवा संगठन
बस स्टैंड में एक भी बस नहीं आती। केवल कुछ निजी वाहन खड़े रहते हैं। जब बसें ही बस स्टैंड के अंदर नहीं जाएंगी तो बस स्टैंड कैसा। -राम मिलन यादव
सरकार को बस स्टैंड के हालात पर ध्यान देना चाहिए। रेवाड़ी शहर के बाद धारूहेड़ा जिले का सबसे बड़ा शहर है लेकिन विकास के मामले में हालात बद से बदतर है। बस स्टैंड का जल्दी से जल्दी सुधार होना चाहिए।
राकेश कुमार
बारिश के समय बस स्टैंड में पानी भरने की समस्या है। इसके लिए जीएम से बात की गई है। उनके अनुसार चंडीगढ़ से जनरेटर खरीदने की परमिशन लेनी पडे़गी। तब ही पानी का स्थायी समाधान हो सकेगा। -सूरजभान, धारूहेड़ा बस स्टैंड प्रभारी
समस्या के बारे में जानकारी है। एक रूट की बसें यहां रुकती हैं। समस्याओं का भी शीघ्र समाधान कराया जाएगा। -लाजपत राय, जीएम, रोडवेज, रेवाड़ी