रेवाड़ी। जिले की करीब दस लाख की आबादी की प्यास बुझाने के लिए जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की तरफ से 88 बड़े जलघर बनाए गए हैं। ये नहरी पानी पर आधारित हैं। इसके अलावा विभाग की ओर से 601 ट्यूबवेल भी लगाए गए हैं। इसके बाद भी लोगों को पेयजल के लिए परेशान हो पड़ता है। मानसून के सीजन में तो नहरों में निरंतर पानी आता रहता है, जिससे पानी की आपूर्ति सामान्य रहती है, लेकिन मानसून खत्म होते ही नहरों में पानी की कमी हो जाती है। इससे जलघरों के टैंक भी सूख जाते हैं। लोगों ने मांग की है कि नहरों में लगातार पानी चलता रहे, जिससे उन्हें जलापूर्ति मिलती रहे।
रेवाड़ी शहर में पानी की उपलब्धता को देखा जाए तो दस दिन के पानी की कमी रहती है। हालांकि अगर नहर में पानी निरंतर चलता रहे तो उपलब्धता पूरी रहती है। अगर नहर में पानी 15 दिन चलता है और 24 दिन बाद आता है तो शहर के दोनों जलघरों में मात्र 13 से 14 दिन के पानी का स्टोर रहता है। उस स्थिति में पानी की आपूर्ति का समय कम कर काम चलाया जाता है। इसके कारण शहर में पानी की संकट खड़ा हो जाता है। सबसे अधिक पानी की समस्या गर्मी के मौसम में आती है। इस समय नहरों में पानी की कमी रहती है और खपत बढ़ जाती है।
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दो बड़े जलघरों से आता है पानी
शहर में जनस्वास्थ्य विभाग की तरफ से पानी उपलब्ध कराने के लिए लिसान व कालका गांव में दो बड़े जलघरों का निर्माण किया गया है। यहां से शहर में बनाए गए बूस्टरों तक पानी आता है और वहां से शहर के करीब ढाई लाख लोगों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
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135 लीटर प्रति दिन प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता के लिए बनाया जाएगा जलघर
विभाग की तरफ से चांदावास गांव में करीब 50 करोड़ की लागत से जलघर का निर्माण करने की योजना चल रही है। शहर के लिए बनाए जाने वाल नए जलघर से 135 लीटर पानी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं रेलवे लाइन से चांदावास गांव की तरफ के शहर के हिस्से को अलग कर नए जलघर से जोड़ दिया जाएगा और पुराने जलघरों से इस हिस्से को अलग करने के बाद बाकि बचे हिस्से में पानी की उपलब्धता बढ़ जाएगी, जिससे पानी की किल्लत नहीं होगी।
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जलघर व ट्यूबवेल की स्थिति
नहर पर आधारित जलघर
डिविजन का नाम ग्रामीण शहरी कुल संख्या
बावल 16 02 18
रेवाड़ी 16 02 18
कोसली- 51 01 52
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ट्यूबवेल
डिविजन का नाम ग्रामीण डीप ग्रामीण शेडो शहरी डीप शहरी शेडो टोटल
बावल- 276 05 07 0 288
रेवाड़ी- 149 53 02 0 204
कोसली- 109 0 0 0 109
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बुस्टर:
डिविजन का नाम- ग्रामीण शहरी
बावल- 29 08
रेवाड़ी- 57 02
कोसली- 37 20
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ग्रामीण बोले-पेयजल समस्या की ओर से नहीं दिया जा रहा ध्यान
कुंड क्षेत्र में लंबे समय से पेयजल की किल्लत चली आ रही है। यहां का भूमिगत जलस्तर करीब छह सौ फीट तक जा चुका है। इसके कारण क्षेत्र में कृषि करना भी मुश्किल हो रहा है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
-जगत सिंह, मनेठी
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भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। यही कारण है कि लोगों के सामने जलसंकट पैदा हो गया है। पानी का स्तर नीचे जाने के कारण क्षेत्र की कृषि भी प्रभावित हो रही है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
-अश्विनी, मनेठी
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क्षेत्र में पानी की लंबे समय से किल्लत चल रही है। सरकार की ओर से पानी के लिए काफी प्रबंध किए जा रहे हैं। इसके बावजूद भी यहां पानी की संकट लगातार गहराता जा रहा है।
-विजयपाल मुंशी, बासदुदा
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सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी क्षेत्र में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। भूमिगत जलस्तर भी काफी नीचे जा चुका है, जिसके कारण यहां खेती करना भी मुश्किल हो रहा है।
-नितिन, माजरा
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- वर्जन:
नहरों में निरंतर पानी चलता है तो समस्या नहीं होती। मानसून के बाद जब 24 दिन में नहर में पानी आता है तो करीब दस दिन के पानी की कमी शहरी क्षेत्र में रहती है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में तो कुछ हद तक बोरिंग के पानी से काम चला लिया जाता है।
- विनय चौहान, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग, रेवाड़ी।
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