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निजी बसों के शामिल करने के विरोध में की जा रही हड़ताल से 40 लाख रुपये का नुकसान

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अमर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी। रोडवेज बेड़े में निजी बसों को शामिल करने और सितंबर माह में आयोजित की गई हड़ताल के दौरान एस्मा के तहत दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की मांग को लेकर कर्मचारियों में रोष बढ़ने लगा है। अब रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में प्रबंधक निरीक्षक, उपनिरीक्षक व क्लर्क भी उतर आए हैं। वहीं सरकार ने कड़ा रूख अपनाते हुए तालमेल कमेटी में शामिल पांचों यूनियनों के प्रधानों को नोटिस देने के साथ ही 284 चालक व परिचालकों के खिलाफ एस्मा के तहत केस दर्ज करा दिया है। दो चालक व एक परिचालक को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा मिनिस्ट्री स्टाफ के डिपो प्रधान बीरसिंह को सुबह शहर के आंबेडकर चौक के समीप गिरफ्तार कर सस्पेंड कर दिया है। प्रोबेशन पीरियड के तहत कार्य करने वाले 39 में से 20 कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। जिले में रोडवेज की ओर से बिना परिचालकों के 24 बसों का संचालन किया गया।

मैनेजमेंट स्टाफ भी हुआ हड़ताल में शामिल
सरकार के आदेश के बाद वीरवार को मैनेजमेंट स्टाफ को रोडवेज बसों में परिचालक के रूप में कार्य करने से मना कर दिया। इसके साथ ही वे लोग हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के समर्थन में उतर आए और धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का कहना है कि वे हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के साथ हैं। उनका कार्य परिचालन करना नहीं है। वर्कशॉप के मिस्त्रियों ने भी टिकट काटने से मना कर दिया है।
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पुलिस बल रहा तैनात
हड़ताल के मद्देनजर पुलिस और प्रशासन अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद भी रोडवेज प्रशासन हड़ताल को विफल करने में कामयाब नहीं हो पाया। स्थगन आदेश और एस्मा की परवाह किए बगैर रोडवेज कर्मचारियों ने बसों का संचालन नहीं होने दिया। जबकि लगभग 500 से अधिक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए और वे ड्यूटी पर ही नहीं आए। इसकी वजह से बसों का संचालन भी नहीं हो पाया।
रोडवेज को 35 लाख से अधिक का नुकसान
रेवाड़ी डिपो के बेडे़ में शामिल 151 बसों में से लगभग 130 बसें रोड पर दौड़ती है, जिनसे प्रतिदिन लगभग 14 लाख रुपये की आय होती है। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से विभाग को तीन दिन में करीब 35 लाख रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है।
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प्राइवेट बसों ने बढ़ाए चक्कर
रोडवेज बसों की हड़ताल के कारण प्राइवेट बस संचालकों ने अपनी बसों के चक्कर बढ़ा दिए हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर प्राइवेट बस संचालकों द्वारा अधिक किराया वसूल किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन अधिकांश बसों में सामान्य दिनों की तरह ही किराया वसूला जा रहा है। प्राइवेट बसों के अधिक संचालन के कारण लोगों को ज्यादा समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
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