रेवाड़ी। रोडवेज बेड़े में अनुबंध के आधार पर 700 निजी बसों को शामिल करने के फैसले के खिलाफ रोडवेज ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर हुई हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। जिला प्रशासन ने बुधवार सुबह बसों का संचालन कराने का प्रयास किया इसके बावजूद केवल 25 बसों का ही संचालन हो पाया। सहकारी समिति और प्राइवेट परमिट धारक बसों का संचालन बस स्टैंड से कराने के कारण यात्रियों को राहत देने की कोशिश की गई। दिनभर बस स्टैंड परिसर में अफरा-तफरी का आलम रहा। एक तरफ पुलिस और प्रशासन बसों का संचालन कराने की कोशिश में लगे रहे, वहंी दूसरी तरफ कर्मचारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। रेवाड़ी डिपो के बेड़े में रोडवेज की 146 बसें हैं। इनमें से हर रोज करीब 120 से 125 बसों का संचालन होता है। मंगलवार शाम को ही हड़ताल होने की वजह से रोडवेज की लंबे रूटों पर बसें नहीं जा पाईं। इस वजह से रोडवेज को मंगलवार को करीब पांच लाख रुपये और बुधवार को करीब 13 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
शहर के बस स्टैंड से सुबह साढ़े चार बजे चंडीगढ़ के लिए बस रवाना होती है। उसके बाद दिल्ली, जयपुर, आगरा, कोटा, बीकानेर सहित अन्य लंबे रूटों की बसों रवाना होती हैं। मंगलवार शाम को ही हड़ताल पर गए रोडवेज कर्मचारियों ने देर रात को बस स्टैंड और कार्यशाला में डेरा डाल दिया। जब सुबह के समय बसों के संचालन का प्रयास किया तो कार्यशाला के गेट के आगे धरने पर बैठ गए। इसके बाद बसों का संचालन नहीं हो पाया। रोडवेज कर्मचारियों का संख्या बल बढ़ गया। इससे चलते कर्मचारियों द्वारा धरना जारी रखा गया। इसी बीच राज्य के कई जिलों में बसों का संचालन प्रारंभ होने के बाद स्थानीय प्रशासन यहां पर भी हरकत में आया जिसके बाद कर्मचारियों की गिरफ्तारियां देनी प्रारंभ कर दी। पुलिस की तरफ से रोडवेज के लगभग 150 से अधिक कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद आलम यह हो गया कि पुलिस के पास कर्मचारियों को बैठाने तक की जगह कम पड़ गई।
उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक पहुंचे बस स्टैंड, कराया बसों का संचालन
कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा और पुलिस अधीक्षक राजेश दुग्गल बसों के संचालन का जायजा लेने पहुंचे। यहां पहुंचने और रोडवेज कर्मियों की गिरफ्तारी के बाद आंबेडकर चौक से संचालित हो रही सोसायटी और प्राइवेट बसों का संचालन बस स्टैंड से कराया गया। इसके बाद कार्यशाला से छह बसों को निकालकर उनको बूथों पर लगाकर बैजनाथ, दिल्ली, झज्जर, पटौदी, आगरा, कोटकासिम, बावल के साथ लोकल रूटों पर रवाना किया। इस तरह प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद 25 बसों का संचालन हुआ। चालकों के साथ परिचालकों के भी हड़ताल में शामिल होने के कारण सुबह के समय आने वाला स्टाफ नहीं होने से रोडवेज प्रबंधन अधिक बसों का संचालन नहीं कर पाया। उधर कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद रोडवेज महाप्रबंधक और प्रशासनिक अधिकारी हड़ताली कर्मचारियों से मिलने पहुंचे और उनसे काम पर लौटने का आह्वान किया लेकिन ज्यादातर कर्मचारी हड़ताल की मांग पर अडिग रहे।
पुलिस वालों ने थामे रोडवेज के स्टेयरिंग
एस्मा के बावजूद कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने और बसों का संचालन नहीं होने से प्रशासन के समक्ष बड़ी चुनौती आ गई थी। इसके चलते उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को खुद बस स्टैंड पर पहुंचना पड़ा। इसके बाद जब रोडवेज बसों का संचालन प्रारंभ कराया गया तो चालक नहीं मिल पाए। इसके कारण कई पुलिस कर्मियों को भी बसों को लेकर लोकल रूटों पर भेजा गया। कई बसों का संचालन तो बगैर परिचालक के ही करना पड़ा। इससे यात्रियों को किराया भी नहीं देना पड़ा। दोपहर बाद शाम के स्टाफ को बुलाकर स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया गया लेकिन फिर भी 25 से अधिक बसों का संचालन नहीं हो सका। रेवाड़ी में अन्य जिलों के मुकाबले हड़ताल का अधिक असर रहने के कारण बुधवार को प्राइवेट ऑपरेटरों ने जमकर चांदी कूटी। तमाम लोकल मार्गों पर चलने वाली प्राइवेट बसों को बस स्टैंड के अंदर पर बूथ पर लगाने के बाद लगभग एक घंटे तक का समय मिला। इनको यात्री भी खूब मिले और उनको भटकना नहीं पड़ा।
राजस्थान परिवहन निगम ने कम की मुश्किल
हरियाणा रोडवेज की हड़ताल के बीच राजस्थान परिवहन निगम की बसों का संचालन होने से भी यात्रियों को काफी राहत मिल गई। राजस्थान परिवहन निगम की बसें चुरू, झुंझुनू, जोधपुर, बीकानेर, सीकर सहित अन्य शहरों से वाया रेवाड़ी होकर ही दिल्ली के लिए चलती हैं। इसी तरह दिल्ली-जयपुर हाईवे पर भी इनका संचालन बरकरार रहने के साथ हरियाणा रोडवेज की अन्य डिपो की बसों का संचालन होने से यात्रियों की मुश्किल काफी कम हो गई।