शाम होते ही शहर में घुस जाते हैं ओवरलोड डंपर
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। प्रशासन का दावा कुछ भी लेकिन ओवरलोड डंपरों के आगे सब फेल है। पहले नाके लगाए फिर भी इन पर लगाम नहीं लग सकी अब नाके हटाने के बाद हालात यह हैं कि शाम ढलते ही शहर की सड़कों पर ओवरलोड डंपरों का राज हो जाता है। शहर का ट्रैफिक शाम को अधिक होने के बावजूद भी प्रशासन इनको रोक नहीं रहा है। इससे हादसा होने का डर बना रहता है।
प्रशासन ने शहर में इनके प्रवेश का समय रात आठ बजे तय किया हुआ है। लेकिन इनका प्रवेश पहले ही शुरू हो जाता है। इससे पहले दिनभर में आने वाले इन डंपरों की कतार नारनौल रोड पर लग जाती है। इनकी संख्या 100 से 150 के बीच रहती है। शाम ढलते ही जैसे ही शहर में इनका प्रवेश होता है तो उस समय गर्मी की वजह से शहरी ट्रैफिक भी अधिक रहता है। इससे लोगों के लिए सड़कों पर चलना भी मुश्किल हो गया है। शहर होने के बावजूद भी इन डंपरों के पहिये सरपट दौड़ने लगते हैं। बेलगाम दौड़ने वाले डंपरों केे कारण शहर में पहले भी जहां कई बार हादसे हो चुके हैं ऐसे में परिवार के साथ घूमने निकलने वालों के लिए यह किसी यमदूत से कम नहीं हैं।
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सबसे अधिक हैरानी इस बात की है कि नारनौल रोड से भाड़ावास रोड तक बाईपास होने के बावजूद शहर के अंदर से डंपर गुजरते हैं। शाम को अब आठ बजे से ही इनका शहर में प्रवेश हो जाता है। गर्मियों की वजह से लोग देर शाम को ही खरीदारी अथवा घूमने के लिए निकलते हैं। इनके बगल से निकलने भर से लोग डरने लगे हैं। - दीपक मखीजा
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पुलिस प्रशासन को चाहिए कि डंपरों का शहर में प्रवेश की समय सीमा कम से कम रात 10 बजे किया जाए। इससे पहले तमाम डंपरों को बाईपास से गुजारा जाए। शहर के सभी चौराहों पर पुलिसकर्मियों और होमगार्ड के तैनात होने के बावजूद भी ये बाजारों में भी बहुत तेजी से गुजरते हैं। - कैैलाशचंद
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शहरी क्षेत्र में तो इनके अंदर आने पर पूर्ण पाबंदी होनी चाहिए। जब दिन में ये भाड़ावास रोड के बाईपास से गुजर सकते हैं तो रात को शहर के अंदर प्रवेश क्यों दिया जाता है। प्रशासन इन पर लगाम लगाने में पूरी तरह से विफल हो चुका है। तेज रफ्तार डंपरों के कारण शहर में कई बार लोगों की जान भी जा चुकी है। - उत्तम सिंह
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शहर में ओवरलोड डंपरों के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं लेकिन अब लगता प्रशासन को फिर किसी हादसे का इंतजार है। शाम ढलते ही शहर की सड़कों पर दुपहिया वाहन चालकों और कार चालकों के लिए निकलना बेहद मुश्किल है। नारनौल रोड से गढ़ी बोलनी रोड तक पूरा काफिला चलता है। डंपरों के कारण शहर की सड़कें भी टूटने लगी हैं। - कोमल सैनी
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ये हुए हादसे
- 21 जून 2017 की रात को शहर के बस स्टैंड के समीप दुकान में घुसा डंपर
-10 अक्टूबर 2017 को नाईवाली चौक के निकट ओवरलोड डंपर पलटने से दो पोल टूटे, दिन भर जाम रहा शहर 22 अक्टूबर 2017 को नाइवाली चौक पर ओवरलोड डंपर की टक्कर से गिरे बिजली पोल, दिनभर लगा रहा जाम
8 नवंबर 2017 नाईवाली चौक पर कैंटर की टक्कर से एक व्यक्ति की मौत
13 दिसंबर 2017 को हाईवेे पर ट्रक ने खोया नियंत्रण, दो घायल और ऊंट की मौत
17 दिसंबर 2017 को दिल्ली जयपुर हाईवे पर असाही कंपनी के निकट ट्राला और ट्रक की भिड़ंत में एक मौत और एक घायल
22 दिसंबर 2017 को गुडियानी पाल्हावास रोड पर अहमदपुर पडतल बस स्टैंड पर गांव कतोपुरी निवासी 8 वर्षीय देव की मौत, लोगों की किया सड़क जाम
14 जनवरी 2018 को असाही इंडिया कंपनी के डंपर ने कार को मारी टक्कर, दो की मौत
14 जनवरी 2018 दिल्ली जयपुर हाईवे स्थित गांव डयोढई के निकट दो की मौत
-15 जनवरी 2018 की रात जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर के निकट कनिष्ठ अभियंता को कुचला
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वर्जन
नो एंट्री से पहले शहर में डंपरों के प्रवेश पर रोक है। इससे पहले शहर में एंट्री करने पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है। इसको लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। - हरी सिंह, ट्रैफिक थाना प्रभारी।