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सरसों की

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सरसों की खरीद की मारामारी से किसान परेशान
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
मंडियों में सरसों बेचने आए किसानों की हालत खराब है। एक तरफ मंडी सरसों से अटी हुई है जबकि दूसरी तरफ बिक्री के लिए टोकन की मारामारी। किसान यदि तय दिवस में बिक्री नहीं कर पाए तो फिर नुकसान ही नुकसान है। किसानों के अनुसार यहां टोकन की एक ही खिड़की है। इस कारण कागजात चेक कराने के बाद टोकन लेने के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। कर्मचारियों द्वारा एक साथ टोकन बांटने से भी परेशानी हो रही है। किसानों ने सरसों का तोल करते समय भी धाधंलेबाजी का भी आरोप लगाया है। सरसों की तुलाई करते समय बोरी को एक किलो के बराबर रखा जा रहा है। इतना ही नहीं उठान कार्य भी प्रभावित हो रहा है, इस वजह से किसानों को अपनी सरसों तुलाई कराने में काफी परेशानी आ रही है। मंडी में अभी 20 हजार से अधिक सरसों के बैग रखे हैं।

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व्यवस्था के नाम पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। टोकन के लिए महज एक ही खिड़की है तथा टोकन भी एक साथ बांट दिए जाते हैं जिसकी वजह से कई किसान तो इससे वंचित ही रह जाते हैं। बोरी के वजन के नाम पर भी एक किलो अधिक सरसों ली जा रही है। - सुचेत कुमार, किसान बास बटौड़ी।
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सुबह जल्दी से लाइन में लगने के बाद नंबर नहीं आ रहा हैं। कर्मचारी अपनी मनमर्जी से कार्य कर रहे हैं। जिसके लिए हमें परेशानी उठानी पड़ रही हैं। बोरी के वजन के नाम एक किलो सरसों की कटौती करना गलत है। प्रशासन इसकी जांच कराएं। हरिराम, किसान चौकी।
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टोकन के लिए एक ही खिड़की है जबकि उससे पहले की प्रक्रिया कागजात चैक कराने एवं फर्द व जमाबंदी लेने के लिए भी बहुत अधिक समय खराब हो जाता है। प्रशासन यहां पर महज खानापूर्ति करके काम चला रहा है। किसानों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। - यशपाल, किसान नांगल मूंदी।
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सुबह जल्दी आकर लाइन में लगने के बाद भी दोपहर तक नंबर नहीं आता हैं। जिससे काफी परेशानी उठानी पड़ती हैं। दोपहर के समय इतनी भीषण धूप होती है कि खड़े रहना बिल्कुल भी संभव नहीं है तथा छांव की व्यवस्था के तौर पर कोई उपाय नहीं है। हकीकत, किसान बास बटौड़ी।
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सबसे अधिक परेशानी यह है कि सरसों में अभी भी नमी बताकर सैंपल रिजेक्ट किए जा रहे हैं जबकि इस समय तो नमी है ही नहीं। सरसों खरीद कार्य में व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमराई हुई है। - सज्जन सिंह, किसान घासेड़ा।
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