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मोबाइल पर पूछा ओटीपी नंबर और खातों से 10 मिनट में ट्रांसफर हो गए रुपये

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मोबाइल पर ओटीपी नंबर पूछा और 10 मिनट में खाते से ट्रांसफर हो गए रुपये
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-एटीएम का क्लोन तैयार कर नकदी निकालने के मामले बढ़े, एक माह में आधा दर्जन केस आए सामने, सुराग नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। जिले में साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। कभी एटीएम ब्लॉक होने के बहाने से पिन नंबर की जानकारी लेकर खाते से नकदी ट्रांसफर करने तो कभी एटीएम का क्लोन तैयार कर खाते से रुपये निकाले के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। एक माह के दौरान करीब आधा मामले दर्ज हो चुके हैं। लेकिन किसी भी मामले में पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंच पाई है। त्यौहारों के समीप इस तरह की घटनाएं ज्यादा होने लगती हैं।
धारूहेड़ा थाना क्षेत्र के गांव खिजूरी निवासी महेश ने बताया कि उसका एटीएम भी उसके पास है और किसी को पासवर्ड भी नहीं बताया इसके बावजूद 28 फरवरी को उसके खाते से 70 हजार रुपये की नकदी निकाल ली गई। उसके मोबाइल में नकदी निकाले जाने का संदेश आने पर ठगी का पता चला।
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ऐसी ही घटना गांव बटौड़ी निवासी प्रवीण के साथ 13 फरवरी को हुई। उसके खाते से दो बार में 40 हजार रुपये निकाल लिए गए। उसने भी न तो एटीएम किसी को दिया और न ही किसी को पासवर्ड बताया। दोनों ही ट्रांजेक्शन दिल्ली स्थित ओखला क्षेत्र के एटीएम से हुई है। ठगी के बाद उसने बैंक में संपर्क कर एटीएम और बैंक खाता बंद कराया।
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इसी क्रम में जिले के बावल थाना क्षेत्र के गांव खंडोडा निवासी जयदीप के मोबाइल पर कॉल कर आरोपी ने उसका बैंक खाता और एटीएम बंद होने का झांसा दिया। चालू करने के लिए एटीएम का पिन और ओटीपी नंबर पूछा। आरोपी ने दस मिनट में खाते से 80 हजार रुपये ट्रांसफर कर लिए। मोबाइल पर रुपये निकालने का मैसेज आया तो शिकायत बैंक अधिकारी और पुलिस को दी।
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उपभोक्ता ध्यान दें
बैंक कभी भी उपभोक्ता से एटीएम नंबर, ओटीपी और सीवीसी नंबर नहीं पूछता है।
मोबाइल पर लोग किसी को खातों और एटीएम नंबर की जानकारी न दें।
ऑनलाइन खरीद के बाद मोबाइल पर मैसेज आता है। इसमें संबंधित ई-कंपनी का एड्रेस होता है। कंपनी के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर ट्रांजेक्शन रुकवाया जा सकता है।
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ऑनलाइन ठगी होने पर तत्काल पुलिस से संपर्क करें।
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वर्जन
साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। शिकायतों के बाद पुलिस द्वारा मामले दर्ज कर जांच शुरू की जा रही है। ऑनलाइन शॉपिंग के कुछ मामलों में ट्रांजेक्शन को रुकवाया गया है। पुलिस की साइबर सेल जांच कर रही है।
-राहुल शर्मा, पुलिस अधीक्षक
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