धारूहेड़ा। शहर के एनएच-48 स्थित बेस्टेक मॉल के पास हरियाणा बिजली वितरण निगम की ओर से 66 किलोवाट (केवी) का गैस इंसुलेटेड उपकेंद्र बनाया जाएगा। इससे औद्योगिक क्षेत्र को बेहतर तरीके से बिजली की आपूर्ति की जा सकेगी। यह नया उपकेंद्र निगम की ओर से भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) पर बनाया जाएगा। इसमें ज्यादा जमीन की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके बनने से शहर और गांवों के लोगों व फैक्टरियों को लाभ मिलेगा।
औद्योगिक क्षेत्र में स्थित फैक्टरियों में पिछले दिनों काफी विस्तार हुआ है। इसके चलते निर्बाध रूप से बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इन फैक्टरियों के लिए आसपास के उपकेंद्रों से बिजली की आपूर्ति की जा रही है। हालांकि कुछ फैक्टरियां तो ऐसी भी हैं ,जिन्होंने बिजली कट से तंग आकर अपने खुद के जेनेटर लगा लिए हैं, लेकिन एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण की वजह से जेनरेटर पर प्रतिबंध होने के कारण उन्हें परेशानी होती है। ऐसे में उन्हें चोरी-छिपे जेनरेटर चलाना पड़ता है। वहीं इन फैक्टरियों के आसपास जहां पिछले दो-तीन साल पहले खाली जमीन पड़ी थी, वहां भी अब लोगों ने अपने घर बना लिए हैं। ऐसे में यहां बिजली की ज्यादा मांग बढ़ गई है, जिसको देखते हुए निगम ने 66 किलोवाट (केवी) का नया बिजली गैस इंसुलेटेड उपकेंद्र बनाने का फैसला लिया गया है। यह नया उपकेंद्र करीब 1.35 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा। इसके लिए फिलहाल निगम को जमीन हस्तांतरण होनी है। इसके बाद तुरंत कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। निगम का लक्ष्य उपकेंद्र को 2024 से पहले तैयार करना है। ताकि लोगों को बिजली आपूर्ति सुचारु मिल सके।
निर्माण कार्य के लिए मिली मंजूरी
उपकेंद्र अब तक की सबसे नवीनतम तकनीक से बनेगा। तकनीक से उपकेंद्र के निर्माण में पुरानी तकनीक की तुलना में मात्र एक चौथाई जमीन की जरूरत होती है। हालांकि निर्माण में लागत जरूर कुछ ज्यादा आती है। हरियाणा बिजली वितरण निगम के रेवाड़ी अधिकारियों की ओर से निदेशालय के पास जीआईएस तकनीक के उपकेंद्र का प्रस्ताव रखा था, जिसको मंजूरी प्रदान कर दी गई है।
वर्जन
धारूहेड़ा में बनने वाले उपकेंद्र के लिए प्रक्रिया चल रही है। जमीन हस्तांतरण का कार्य पूरा होने के बाद निर्माण कार्य को प्रारंभ कराया जाएगा। इससे औद्योगिक क्षेत्र को बेहतर तरीके से बिजली की आपूर्ति की जा सकेगी। साथ ही आसपास की हजारों की आबादी भी लाभान्वित होगी।
- सोनू यादव, उप मंडल अधिकारी बिजली निगम रेवाड़ी।