रेवाड़ी। गुरुग्राम में आयोजित कार्यक्रम में रोडवेज की 65 बसें भेजने के कारण बुधवार को रेवाड़ी बस स्टैंड पर बसों की कमी का असर नजर आया। डिपो की 135 संचालित बसों में से 65 बसें कम होने से स्थानीय रूटों पर यात्रियों को सीमित बसों के सहारे सफर करना पड़ा। कई रूटों पर बसों का इंतजार कर रहे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। बसें नहीं मिलने पर यात्रियों को निजी बसों का सहारा लेना पड़ा।
सुबह से ही बस स्टैंड पर यात्रियों की भीड़ रही। ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास के कस्बों से आने-जाने वाले यात्रियों को रोडवेज बसों का इंतजार करना पड़ा। कई बूथों पर निर्धारित समय पर बसें नहीं पहुंची।
इससे यात्रियों को एक रूट की बस के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। वहीं, जिन निजी बसों का संचालन हो रहा था, उनमें यात्रियों की संख्या अधिक होने से कई बसों में क्षमता से अधिक यात्री दिखाई दिए।
दोपहर करीब सवा बारह बजे बूथ नंबर 10 से 14 तक सभी खाली थे। वहीं निजी बसों की संख्या अधिक थी अधिकांश बूथों पर निजी बसें लगी थी। बस लगने के महज पांच मिनट बाद ही ठसाठस हो रही थी। शाम तक स्थिति को सामान्य करने के लिए जिम्मेदारों को भी पसीना बहाना पड़ा।
दोपहर में खाली पड़े रहे कई बूथ
दोपहर के समय बस स्टैंड के कई बूथ खाली दिखाई दिए। आम दिनों में जिन बूथों पर बसों के आने-जाने से यात्रियों की आवाजाही रहती है, वहां बुधवार को बसों की संख्या कम रही। बसों की कमी का सबसे अधिक असर लंबे और ग्रामीण रूटों पर दिखाई दिया। यात्रियों का कहना था कि रोडवेज बसों की संख्या कम होने से एक बस के निकलने के बाद अगली बस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
निजी बसों के सहारे चला सफर
रोडवेज बसें नहीं मिलने पर यात्रियों को निजी बसों की ओर रुख करना पड़ा। बस स्टैंड से बाहर निकलते ही निजी बसों में यात्रियों की भीड़ दिखाई दी। कई यात्रियों ने बताया कि जरूरी काम से जाने के कारण उन्हें मजबूरी में निजी बसों से सफर करना पड़ा। यात्रियों का कहना था कि त्योहार और कार्यक्रमों के समय बसों की जरूरत सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है, ऐसे में रोडवेज की बड़ी संख्या में बसें दूसरे कार्यक्रम में भेजे जाने से परेशानी बढ़ गई।
70 बसों के सहारे संभाली व्यवस्था
रेवाड़ी डिपो से रोजाना करीब 135 बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें से 65 बसें गुरुग्राम कार्यक्रम के लिए भेजे जाने के बाद स्थानीय व्यवस्था करीब 70 बसों के सहारे चलानी पड़ी। इससे रूटवार बसों की संख्या प्रभावित हुई। यात्रियों का कहना था कि परिवहन विभाग को कार्यक्रम के लिए बसें भेजने से पहले स्थानीय रूटों की यात्री संख्या और जरूरी बसों की उपलब्धता को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि यात्रियों को बस स्टैंड पर घंटों इंतजार न करना पड़े।
वर्जन:
उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार बसों को भेजा गया था। लेकिन स्थानीय रूटों पर बसों के फेरे बढ़ाए गए तथा जरूरत के रूटों पर बसों का अतिरिक्त संचालन किया गया। लंबे रूटों की अधिकांश बसें तय समय पर चली हैं साथ ही यात्रियों की संख्या के हिसाब से रूटों पर संचालन भी किया गया है।-निरंजन शर्मा, महाप्रबंधक, रेवाड़ी डिपो।