शहरवासियों की प्यास बुझाने के लिए विकल्प के तौर सांसद निधि से 10 लाख रुपये खर्च कर शहर के 31 वार्ड में 62 हैंडपंप लगाए गए थे। लेकिन आलम ऐसा है कि 8 माह बाद भी नगर परिषद के अधिकारी हैंडपंप कहां लगाए गए, इसका जवाब नहीं दे पाए। ऐसे में सवाल है कि जिम्मेदारों के पास हैंडपंप कहां लगे इसकी जानकारी नहीं है या फिर कोई गोलमाल है।
वर्ष 2017 में शहर के प्रत्येक वार्ड में दो-दो हैंडपंप लगाने के लिए सांसद निधि से नगर परिषद को 10 लाख रुपये दिए गए थे। नगर परिषद से मिले आंकड़ों के अनुसार टेंडर कर प्रत्येक वार्ड में हैंडपंप लगा गए, बिल भी बनाया गया। लेकिन धरातल पर हैंडपंप की कहां है, इसकी जानकारी नहीं होना गंभीर बात है। ऐसे में नप अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठना निश्चित है।
सीटीएम से लेकर कमिश्नर के आदेश नहीं दे सके भौतिक जानकारी
26 जुलाई 2019 को नगर परिषद हैंडपंप के बारे में जवाब मांगा गया था, लेकिन नप अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद मामला 30 अगस्त को सीटीएम के पास पहुंचा। यहां पर नप अधिकारियों के जवाब के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, लेकिन जवाब नहीं दिया गया। 15 अक्तूूबर 2019 को एक बार फिर से सूचना आयुक्त के पास जानकारी के लिए पत्र लिखा गया। इसके बाद 28 फरवरी 2020 को नप की ओर से ईओ ने बिल व टेंडर की कॉपी जमा कराई, लेकिन हैंडपंप कहां लगे इसका जवाब नहीं दे पाए। फटकार लगाने के बाद भी आज तक जिम्मेदारों की ओर से हैंडपंप के बारे में भौतिक स्थिति की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। यहीं से नगर परिषद पर सवाल खड़े होते हैं कि बिल देने के बाद भी जानकारी क्यों नहीं है।
गर्मी शुरू होते ही जलघर सूखे, अब हैंडपंप तलाश रहे लोग
सिंचाई विभाग की ओर से नहरी पानी नहीं छोड़े जाने के चलते शहर के कालाका स्थित सभी पांचो जलघर सूख चुके हैं। जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से राशनिंग कर पानी दिया जा रहा है, लेकिन यदि आज भी नहरी पानी नहीं आया तो जल संकट गहरा सकता है। जलघरों में पानी नहीं होने की स्थिति में ही वार्ड के लोगों की सहूलियत के लिए सांसद की ओर से 10 लाख रुपये हैंडपंप के लिए दिए गए थे। लेकिन नगर परिषद की लापरवाही सब पर भारी पड़ रही है।
हैंडपंप कहां लगे नप अधिकारियों को देना चाहिए जवाब: सांसद निधि संयोजक
सांसद निधि संयोजक विवेक धींगड़ा ने बताया कि जरूरत के हिसाब से फंड सांसद निधि कोष से मिलता है, इसकी पूरी मॉनिटरिंग एडीसी दफ्तर से होती है। काम नगर परिषद की ओर से कराया गया था, हैंपपंप भी लगे थे। नगर परिषद अधिकारियों का दायित्व बनता है कि वह बताए कहां-कहां हैंडपंप लगाए गए थे।
दो पास हुए थे आज तक नहीं लगे वार्ड में : नरेंद्र राव
वार्ड-14 से कई बार पार्षद रहे अशोक राव के पुत्र एडवोकेट नरेंद्र राव (मोनू) ने बताया कि हमारे वार्ड के लिए दो हैंडपंप पास जरूर हुए थे, लेकिन आज तक एक भी नहीं लग पाया है। गर्मियों में परेशानी बढ़ जाती है, नगर परिषद के अधिकारियों को जवाब देना चाहिए कि कहां पर हैंड पंप लगे।
तीन साल से हैंडपंप की कर रहे हैं तलाश नहीं मिले: साकेत
सामाजिक कार्यकर्ता साकेत धींगड़ा ने बताया कि तीन साल से हैंडपप ढूंढ़ रहे हैं, लेकिन 2017 में लगे हैंडपंप आज तक नहीं मिले हैं। यदि हैंडपंप लगाए जाते तो दिखाई देते, नगर परिषद के अधिकारियों को जवाब देना चाहिए कि कहां पर हैंडपंप लगाए गए हैं।