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गर्मी में होगी ‘अग्निपरीक्षा’

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रेवाड़ी। संसाधनों के अभाव से जूझ रहे दमकल विभाग के लिए गर्मी का मौसम अग्नि परीक्षा देने जैसा है। गर्मी के मौसम में यदि कहीं आग भड़की तो दमकल कर्मियों के लिए इसे रोकना किसी परीक्षा से कम नहीं होगा। उनके सामने सबसे बड़ी समस्या त्वरित पानी मुहैया कराने की होगी। शहर में एकमात्र बूस्टिंग स्टेशन से गाड़ियों में पानी भरा जाता है। इसे अलावा आग बुझाने के लिए जिले में 10 गाड़ियों पर मुट्ठी भर दमकल कर्मी ही तैनात हैं। वर्तमान में 67 हजार हेक्टेयर में सरसों तो 69 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल लगी है। प्रशासन ने आग से निपटने के निर्देश तो जारी कर दिए हैं लेकिन आग लगने की घटनाओं पर सीमित संसाधनों से काबू कैसे पाया जाएगा। प्रशासन ने शहर के पानी की टंकियों और स्वच्छ जलाशयों में वाल्व लगाने के आदेश दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर दमकल कर्मचारी पानी को उपयोग में ला सकें लेकिन इस आदेशों की पालना कर पाना कठिन नजर आ रहा है।

कर्मचारियों की संख्या भी कम
फायर ब्रिगेड में कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। इन गाड़ियों के लिए 26 कर्मचारी तैनात हैं। नॉर्म्स के मुताबिक यह संख्या काफी कम है। ऐसे में शहर में कोई बड़ी आगजनी होने की स्थिति में फायर ब्रिगेड से इस पर काबू पाने की उम्मीद काफी कम है। यह सिलसिला काफी समय से चला आ रहा है। दो दमकल गाड़ियों की स्थिति बदतर बनी हुई है। जिला प्रशासन की ओर से फायर ब्रिगेड की व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी नहीं व्यवस्था
फायर ब्रिगेड की व्यवस्था शहरी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी खराब है। जिले के बावल कस्बे में 3, धारूहेड़ा में 2 और कोसली में एक फायर बिग्रेड की गाड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में मई और जून माह में आगजनी की घटनाएं ज्यादा होती हैं। जो गाड़ियां इन कस्बों में हैं, वे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पर्याप्त नहीं हैं
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दो माह सबसे ज्यादा परेशानी
अभी सर्दी का सीजन शुरू हो गया है। मई और जून माह में सबसे ज्यादा आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। पर्याप्त गाड़ियों की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में काफी समय लग जाता है। ऐसे में नुकसान काफी हद तक बढ़ जाता है।
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बावल और धारूहेड़ा में बढ़ जाती है परेशानी
बावल और धारूहेड़ा दोनों ही औद्योगिक क्षेत्र हैं। यहां सैकड़ों कंपनियां हैं। कई बार कंपनियों में भीषण आग लग जाती है। औद्योगिक क्षेत्र में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की संख्या कम होने के कारण रेवाड़ी और दूसरे जिलों से गाड़ियों को बुलवाया जाता है। पिछले साल भी बावल की दो कंपनियों में एक साथ आग लग गई थी। रेवाड़ी जिले में पर्याप्त फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं होने के कारण पड़ोसी जिले गुरुग्राम और नारनौल से गाड़ियों को बुलाना पड़ा था। समय पर आग नहीं बुझाने के संसाधन नहीं मिलने के कारण दोनों ही कंपनियों को करोड़ों का नुकसान हो गया था।
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रजिस्ट्रेशन के अभाव में खड़ी है बुलेट बाइक
पिछले दिनों फायर ब्रिगेड के बेड़े में तीन नई बुलेट बाइक शामिल की गई थी। हर बुलेट बाइक पर आग बुझाने के संसाधन लगे हैं। रेवाड़ी, धारूहेड़ा व बावल के फायर ब्रिगेड कार्यालय में एक-एक बुलेट खड़ी हुई है, लेकिन अभी तक इन बुलेट बाइक का उपयोग नहीं हुआ है। बुलेट को फायर ब्रिगेड में शामिल करने का मकसद संकरी गलियों में आग लगने की सूरत में तुरंत मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू करना था, लेकिन अभी तक भी बुलेट की बजाए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां ही आग बुझाने का काम कर रही है।
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फिलहाल गाड़ियों से जैसे तैसे काम चलाया जा रहा है। कुछ गाड़ियों की डिमांड मुख्यालय भेजी हुई है। गाड़ियों की संख्या किसी भी शहर में आबादी के हिसाब से होती है। अभी रेवाड़ी और बावल में दो-दो गाड़ियों की जरूरत है। - ताराचंद सैनी, दमकल अधिकारी।
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