अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। नाहड़ खंड के गांव गढ़ी में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे मकान की छत के अभाव में हुई दिव्यांग पप्पू सिंह की मौत के मामले में स्थानीय प्रशासन भी सवालों में आ गया है। दरअसल मृतक पप्पूसिंह की पत्नी द्वारा करीब चार-पांच माह पहले द्वितीय किस्त का आवेदन दिया गया था जबकि एडीसी कार्यालय में यह आवेदन वीरवार को पहुंचा है। जबकि किस्त जारी कराने के लिए प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह आवेदन एडीसी कार्यालय में बहुत पहले ही पहुंच जाना चाहिए था। वहीं शुक्रवार को नाहड़ खंड के विकास एवं पंचायत अधिकारी जानकी प्रसाद भी पीड़ित परिवार से मिले और बातचीत की।
अमर उजाला में 27 दिसंबर को दिव्यांग की छत के अभाव में ठंड से हुई मौत की खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन के साथ चंडीगढ़ तक हड़कंप मच गया था। हालांकि उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया था और इसकी जांच एडीसी प्रदीप दहिया को सौंपी थी। एडीसी की तरफ से की गई प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह आवेदन उनके कार्यालय तक आया ही नहीं है। इसके पश्चात नाहड़ खंड प्रशासन से जब इस बारे में जानकारी मांगी गई तो वहां से पप्पूसिंह की पत्नी आशा देवी की आवास योजना की द्वितीय किस्त का आवेदन मंगाया गया। हालांकि इस मामले में खंड प्रशासन ने कहा है कि उनको भी यह आवेदन कुछ दिन पहले ही मिला। इस आवेदन की द्वितीय किस्त से संबंधित औपचारिकताओं की जांच में यह सही पाए जाने के बाद इसको द्वितीय किस्त स्वीकृति के लिए मंजूर कर लिया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि पीड़ित की पत्नी आशा देवी का दावा है कि वे चार-पांच माह पहले ही आवेदन कर चुके थे तो इतने दिन आवेदन कहां धूल फांक रहा था। हालांकि अभी जांच अधिकारी की तरफ से जांच पूरी की जानी है जिसके बाद ही इस मामले में किस स्तर पर लापरवाही रही है या परिवार की।
परिवार से मिलने पहुंचे बीडीपीओ
अमर उजाला द्वारा घटना के बाद नाहड़ खंड के पंचायत एवं विकास अधिकारी के नहीं पहुंचने को लेकर उठाए गए सवाल के बाद शुक्रवार को बीडीपीओ परिवार से मिलने के लिए पहुंचे। बीडीपीओ ने पप्पूसिंह की पत्नी से बातचीत की और आवास योजना के बारे में जानकारी हासिल की।
डीडीआर के लिए बेटे को कटाए चक्कर
पं. श्यामा प्रसाद मुखर्जी योजना के तहत परिवार के मुखिया की मौत पर मिलने वाली सहायता के लिए डेली डायरी रिपोर्ट डीडीआर या पोस्टमार्टम रिपोर्ट होना जरूरी है। मृतक पप्पूसिंह का बेटा जब पुलिस में डीडीआर के लिए पहुंचा तो पुलिस ने उसकी डीडीआर दर्ज करने से मना कर दिया। इसके बाद पीड़ित पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा जिसके बाद उनकी तरफ से कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।