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हंगामे के बीच जिला योजना कमेटी के चुनाव, 13वें सदस्य का चुनाव टॉस से किया पिंकी ने मारी बाजी

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अमर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी।
जिला योजना समिति के 23 अप्रैल को हुए चुनाव रद्द कराने के बाद सोमवार को पुन: चुनाव कराए गए, जिसमें जमकर हंगामा हुआ। चुनाव कराने और नहीं कराने को लेकर जिला परिषद में बने दो गुटों के पार्षदों के बीच खूब नोक-झोंक हुई। इसके बाद एडीसी प्रवीण दहिया स्वयं बैठक में पहुंचे और पार्षदों को शांत कराकर सर्वसम्मति से 13 सदस्यों का चुनाव कराया। बैठक में दोनों गुटों के छह-छह सदस्यों पर तो सहमति बन गई, लेकिन 13वें सदस्य पर बात फिर बिगड़ गई, जिसके लिए आजाद सिंह और पिंकी गोलियाकी के बीच टॉस कराया गया। टॉस में पिंकी देवी ने बाजी मारी। पिंकी गोलियाकी लोक निर्माण विभाग मंत्री राव नरबीर सिंह के गुट से हैं।
बता दें कि जिला योजना समिति के लिए जिला परिषद के सदस्यों में से 13 सदस्यों का चुनाव किया जाना था। 23 अप्रैल को भी समिति के सदस्यों के चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई थी। उस दिन हुई बैठक में 18 में से 17 सदस्य मौजूद थे, जिसमें नौ सदस्यों का चयन कर लिया गया था। इस बीच दूसरे गुट के पार्षदों ने चुनाव में सहमति नहीं बनने की बात कहते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया था। इसके बाद असंतुष्ट पार्षदों ने उपायुक्त को शिकायत देकर इस चुनाव को रद्द किए जाने की मांग की थी, जिसके बाद उपायुक्त ने तीन दिन पहले नौ सदस्यों के चयन की प्रक्रिया को रद्द करते हुए नए सिरे से चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इस बात को लेकर जिला प्रमुख मंजूबाला ने भी उपायुक्त के समक्ष विरोध जताया था।
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उपायुक्त की तरफ से सात मई को पुन: चुनाव के लिए बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी पार्षद पहुंचे। सोमवार को तय समयानुसार लघु सचिवालय के सभागार में सभी पार्षद पहुंचे, जिसमें जिला परिषद के सीईओ आशीष कुमार को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया था।
10 बजे बैठक शुरू होते ही सत्ता पक्ष की ओर उप जिला प्रमुख जगफूल यादव, पार्षद अनिल कुमार डहीना और अजय पटौदा द्वारा पिछली कार्रवाई के हाजिरी रजिस्टर व डिस्पेच रजिस्ट्रर को प्रस्तुत किए जाने मांग करते हुए कहा कि यदि 23 अप्रैल को हुए चुनाव गलत थे तो क्या उसमें मौजूद अधिकारी भी गलत थे। इन पार्षदों ने नए सिरे से चुनाव कराने का विरोध किया। जबकि दूसरे गुट के पार्षद अमित यादव, हरीश कुमार झाबुआ, रोहन, प्रशांत और पिंकी बार-बार चुनाव की कार्रवाई शुरू कराए जाने की मांग करते पीठासीन अधिकारी से नोमिनेशन फार्म की मांग करते रहे। इसके बाद दोनों गुटों के पार्षदों में जमकर नोक-झोंक शुरू हो गई। इसके चलते बैठक में काफी समय तक हंगामा चलता रहा।
इसी बीच जिला प्रमुख मंजूबाला ने कहा कि समिति के सदस्यों में चुनाव 7 और 6 के अनुपात में कराए जा सकते हैैं, जिस पर दूसरे गुट के पार्षद फिर भड़क गए। दूसरे गुट के पार्षदों का कहना था कि आधे-आधे सदस्य चुने जाएं। मामला बढ़ने के बाद सीईओ ने मामले के संबंध में एडीसी प्रवीण दहिया को अवगत कराया, जिसके बाद 11 बजे एडीसी पहुंचे और दोनों पक्षों से छह-छह सदस्यों पर सहमति बनवाकर सर्वसम्मति से चुनाव कराया। वहीं, 13वें सदस्य के लिए टॉस कराने का फैसला लिया गया। टॉस के लिए एक पक्ष से आजाद सिंह नांधा और दूसरे पक्ष पिंकी गोलियाकी का नाम रखा गया। टॉस से फैसला पिंकी गोलियाकी के पक्ष में आया।

धारूहेड़ा से सर्वसम्मति और बावल के लिए कराया चुनाव
इस कमेटी में बावल और धारूहेड़ा नगर पालिका के भी तीन सदस्यों को शामिल किया गया है। धारूहेड़ा नपा की पार्षद किरण देवी व चंद्रकला का चयन सर्वसम्मति से किया गया। जबकि बावल से चयन के लिए मतदान कराया गया। इसमें हलीरा सिंह विजेता रहे।

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चुने गए 13 सदस्य
1. जिला प्रमुख मंजूबाला
2. अजय पाटौदा
3. अनिल कुमार
4. अमित कुमार
5. कांता देवी
6. जगफूल यादव
7. धर्मेंद्र खटाना
8. नीतू चौधरी
9. रोहन सिंह
10. शशिबाला
11. हरीश कुमार झाबुआ
12. शारदा देवी
13. पिंकी गोलियाकी


यूं चली बैठक
- सुबह 10 बजे सभी पार्षद बैठक में आने शुरू हुए
- साढे़ 10 बजे बैठक की कार्यवाही शुरू हुई
- 10:50 बजे पीठासीन अधिकारी एवं जिला परिषद के सीईओ बैठक को छोड़कर एडीसी के पास गए
- 10: 58 बजे एडीसी बैठक में पहुंचे
- 11:05 बजे एडीसी बैठक से बाहर आए
- 11:10 बजे एडीसी फिर बैठक में आए
- 11:35 बजेजिला प्रमुख मंजूबाला, उप-जिला प्रमुख जगफुल, अजय पटौदा व अन्य पार्षद बैठक से बाहर आए और रणनीति तैयार की
- 11:45 बजेसभी पार्षद सभागार में दोबारा एकत्रित हुए
- 11:50 बजे सभी पार्षदों को नोमिनेशन फार्म वितरित किए गए
- 12:15 बजे सभी पार्षदों में छह-छह सदस्यों के नाम पर सहमति बनी
- 12:45 बजे टॉस कराया गया
- 1:10 बजे एडीसी प्रदीप दहिया ने चुने गए सदस्यों के नामों की विधिवत घोषणा की

डीसी की कार्य प्रणाली का किया विरोध
जिला प्रमुख मंजूबाला ने कहा कि प्रशासन ने पक्षपात पूर्ण ढंग से यह कार्रवाई कराई है। जब 23 अप्रैल को चुनाव हो गए थे तो उन्हें किस आधार पर रद्द किया गया। डीसी का व्यवहार ठीक नहीं है, जिसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे पंचायतों से बातचीत कर डीसी की कार्यप्रणाली का विरोध करेंगे।
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चुनाव रद्द करने पर हुआ विचार
बैठक में उस समय एकदम सन्नाटा छा गया जब चुनाव प्रक्रिया में शामिल पार्षद हरीश झाबुआ को सूचना मिली कि उसके चाचा का देहांत हो गया। इसके बाद सभी पार्षदों में कुछ देर के लिए चुनावी बैठक रद्द करने पर विचार-विमर्श किया गया। काफी देर बाद सभी कि सहमति से चुनाव सोमवार को ही संपन्न कराए जाने पर सहमति बनी।
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