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Rewari News: पीपीपी पोर्टल पर डाटा टैगिंग का 56.31 प्रतिशत कार्य बचा, 10 दिन में करना होगा पूरा

Tue, 06 Jun 2023 11:46 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी। जिले में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) पोर्टल पर डाटा टैगिंग की स्थिति संतोषजनक नजर नहीं आ रही है। इसकी जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंपी गई है। वहीं, स्कूल शिक्षा निदेशालय ने 10 दिनों के अंदर लंबित डाटा सत्यापन कर पोर्टल पर टैगिंग करने के निर्देश दिए हैं। अगर समय पर कार्य नहीं पूरा हुआ तो निदेशालय कड़ा कदम भी उठा सकता है। जबकि स्कूलों में ग्रीष्मकालीन छुट्टियां शुरू हो चुकी है।
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बता दें कि अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर डाटा टैगिंग की प्रगति की समीक्षा की गई थी। इस दौरान 2 जून तक जारी आंकड़ों में सामने आया है कि डाटा सत्यापन की प्रगति का कार्य काफी धीमा चल रहा है। यही कारण है कि निदेशालय ने 10 दिनों के भीतर लंबित डाटा सत्यापन को पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं। गौरतलब है कि 5 साल से 18 साल की आयु के विद्यार्थी का पीपीपी में डेटा अपडेट किया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी सरकारी अध्यापकों को दी गई है। पीपीपी में काफी कमियां सामने आई हैं जिसमें विद्यार्थियों की संख्या में भी सालाना कमाई दिखाई गई है।

डीईओ को बार-बार भेजा जा रहा रिमाइंडर

जिले की बात करें तो अभी व्यवसाय स्थिति 30.21, जन्मतिथि 26.37 और आधार टैगिंग का कार्य 56.31 प्रतिशत बचा हुआ है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो डाटा टैगिंग में और भी समय लग सकता है। शिक्षा निदेशालय द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को बार-बार रिमाइंडर भेजा जा रहा है, ताकि कार्य में तेजी लाई जा सके और निर्धारित समय में डेटा अपडेट हो पाए।
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हर रोज भेजी जा रही है रिपोर्ट

शिक्षा निदेशालय का आइटी विभाग पीपीपी अपडेट का काम धीमा होने के कारण अब हर दिन डीइओ के पास उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट भेज रहा है। जिसमें हर टीचर्स ने एक दिन में कितनी पीपीपी का कौन सी कैटेगिरी का काम पूरा किया, इसका अलग-अलग स्टेट्स आ रहा है। शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार शिक्षकों की ड्यूटी अपने ही कक्षा के छात्रों के परिवार पहचान पत्र से संबंधित त्रुटि को ठीक करने में लगाई गई है ताकि विद्यार्थियों की जन्मतिथि से संबंधित कोई परेशानी नहीं हो।

बाहरी राज्यों के बच्चों के अभिभावकों से नहीं हो पा रहा संपर्क

जो बच्चे दूसरे राज्यों के हैं, उनके माता-पिता से अध्यापकों का संपर्क नहीं हो पा रहा है। इन्हीं बच्चों का कार्य अधिकतर रुक रहा है। ऐसे में काफी समस्या हो रही है। फोन किया जाता है तो नंबर नहीं लगता है। अगर नंबर लग भी जाता है तो वह रेवाड़ी में कहां आएंगे इसका भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता है।

बावल क्षेत्र में हैं अधिक बाहरी राज्यों के बच्चे

जिले में अधिकतर आधार टैगिंग का ही कार्य बचा हुआ है। बाहरी राज्यों के बावल क्षेत्र में बच्चों की संख्या काफी अधिक है। जहां बच्चों के अभिभावकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इस क्षेत्र में काफी कंपनियां हैं, जिनमें बिहार, यूपी, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों के मजदूर कार्य करते हैं। ये वर्षों से यहीं रह रहे हैं, इनके बच्चे भी यहीं की स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करते हैं।

वर्जन:

आधार टैगिंग का ही कार्य बचा हुआ है। जो बच्चे बाहरी राज्यों से जिले में आकर पढ़ रहे हैं उन्हीं का डाटा पीपीपी पोर्टल पर अपडेट करने में समस्या आ रही है। क्योंकि उनके अभिभावकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, इसके लिए कोशिश जारी है।
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- नसीब सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी
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