रेवाड़ी। जिले के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सेहत कार्यक्रम के तहत हुई जांच में 17 हजार के करीब विद्यार्थियों की सेहत खराब मिली है। करीब छह माह तक चली जांच में 52 हजार 205 विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच की गई। 16 हजार 975 विद्यार्थियों में विभिन्न बीमारियां मिली हैं। लगभग हर तीसरा विद्यार्थी किसी न किसी बीमारी से पीड़ित मिला है। सबसे अधिक 7,484 विद्यार्थियों के दांतों और 5,192 विद्याथीZ आंखों की बीमारी से पीड़ित मिले। इसके अलावा चर्मरोग, विटामिन व खून की कमी सहित विभिन्न बीमारियां मिली हैं।
दरअसल समग्र शिक्षा कार्यालय ने सेहत कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जिले के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की जांच कराई थी। समग्र शिक्षा कार्यालय ने सेहत कार्यक्रम तथा स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की 40 से अधिक बीमारियों की जांच की थी। छह माह के दौरान 52 हजार 205 विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच की गई थी। इसमें विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 16 हजार 975 विद्यार्थियों को डिस्ट्रिक अर्ली इंटरवेंशन सेंटर रेफर किया गया है। यहां पर विद्यार्थियों की बीमारियों का इलाज कराया जाएगा। यह आंकड़े समग्र शिक्षा कार्यालय द्वारा सेहत कार्यक्रम के तहत कराई गई विद्यार्थियों की जांच की रिपोर्ट में सामने आई है।
गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों पर दिया जा रहा विशेष ध्यान
जिले के जिन सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों में आंखों और दांतों से संबंधित बीमारियों की संख्या अधिक मिली थी, वहां पर समग्र शिक्षा कार्यालय द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कलस्टर स्तर पर शिविर लगवाए गए थे। इसमें जांच रिपोर्ट के आधार पर विद्यार्थियों को चश्मे और अन्य दवाइयां वितरित की गईं। वहीं अन्य बीमारियों के लिए विद्यार्थियों को नागरिक अस्पताल स्थित डिस्ट्रिक अर्ली इंटरवेंशन सेंटर भेजा जा रहा है। जहां विद्यार्थियों का उपचार किया जा रहा है। गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को बड़े सेंटरों पर रेफर किया जा रहा है।
वर्जन
जिन बच्चों को नियमित रूप से उपचार की जरूरत हैं, उन्हें नागरिक अस्पताल भेजा रहा है। जिन विद्यालयों में विद्यार्थियों में आंखों और दांतों से संबंधित बीमारियों की संख्या अधिक मिली थी, वहां पर स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कलस्टर स्तर पर शिविर लगवाए गए थे।-महेंद्र सिंह खनगवाल, जिला परियोजना संयोजक, समग्र शिक्षा