रेवाड़ी। रोडवेज डिपो में विभाग को सुचारू संचालन के लिए 505 कर्मचारियों की जरूरत है वहीं वर्तमान में 428 कर्मचारी ही 156 बसों के बेड़े को खींच रहे हैं। कर्मचारियों का टोटा आम जनता के लिए मुसीबत बन गया है।
स्टाफ की कमी के कारण प्रतिदिन विभिन्न रूटों पर करीब 25 फेरे मिस हो रहे हैं। खामियाजा चालक और परिचालकों को भुगतना पड़ रहा है। बसों को चलाने के लिए कर्मचारियों का ओवरटाइम 6 घंटे तक बढ़ा दिया गया है। लगातार ड्यूटी के कारण कर्मचारियों में भारी तनाव और थकान देखी जा रही है, जो सड़क सुरक्षा के लिहाज से किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।
विभाग की योजना के अनुसार रेवाड़ी डिपो के बेड़े में करीब 30 नई बसें शामिल की जानी हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब पहले से मौजूद 156 बसें ही पूरे स्टाफ के साथ नहीं चल पा रही हैं।
-
इन रूटों पर सबसे ज्यादा परेशानी
बस स्टाफ की कमी ने रेवाड़ी से जुड़ने वाले प्रमुख रूटों की कमर तोड़ दी है। सबसे ज्यादा मार महेंद्रगढ़, नारनौल, पटौदी और चंडीगढ़ रूट पर पड़ रही है। इन रूटों पर यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रहती है लेकिन बसें समय पर न मिलने से यात्रियों में भारी रोष है। चंडीगढ़ और दिल्ली जैसे लंबे रूटों पर जाने वाले यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, वहीं महेंद्रगढ़ और नारनौल की बसों के फेरे मिस हो रहे हैं।
-
वर्जन:
रोडवेज की तरफ से अभी बेहतर सुविधा प्रदान की जा रही है। 30 बसें जल्द ही आने वाली है। इससे लोगों को काफी फायदा होगा।
निरंजन, जीएम रेवाड़ी।