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भाजपा उपाध्यक्ष से चिट्ठी भेज कर 12 लाख की रंगदारी मांगने वाला लैब असिस्टेंट गिरफ्तार

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अमर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी। रोहड़ाई थाना क्षेत्र के गांव टहना दीपालपुर निवासी एवं भाजपा जिला उपाध्यक्ष रामदत्त भारद्वाज के घर पत्र भेजकर 12 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का मास्टर माइंड उनका पड़ोसी युवक सीताराम ही निकला है। आरोपी युवक गुरुग्राम की एक पैथ लैब में कार्यरत है और उसी ने उनके घर पर पत्र भेजकर रंगदारी मांगी थी। शुक्रवार की रात को सीआईए और रोहड़ाई थाना पुलिस ने आरोपी को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया जिसके बाद शनिवार को उसे अदालत में पेश किया जहां से उसको दो दिन के लिए पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
खुद के जाल में उलझा, पत्र में खुद को लिखा था सीताराम तेरा पिल्ला
आरोपी युवक के भाजपा उपाध्यक्ष के परिवार से संबंधों की नजदीकी का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है उसने रंगदारी के लिए जो पत्र लिखा था उसमें खुद को उनका पिल्ला बताते हुए राशि भी उसके बैग में रख देना। पत्र में आरोपी ने पुलिस को चकमा देने के लिए चकरपुर गांव के दो लोगों के नाम डाल दिए ताकि पुलिस गुरुग्राम के किसी बदमाश पर शक करे। आरोपी ने राशि देने के लिए भी एक नवंबर की अंतिम तिथि दी थी जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के इर्द-गिर्द सादी वर्दी में अपने पुलिसकर्मी छोड़ दिए और जब दो नवंबर की शाम तक भी उसके पास कोई नहीं आया तो पुलिस का शक यकीन में बदल गया जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गुरुग्राम से ही हिरासत में ले लिया और उससे कड़ाई से पूछताछ की तो उसने पत्र लिखना स्वीकार कर लिया।
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उल्लेखनीय है कि भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रामदत्त भारद्वाज को 31 अक्तूबर को एक पत्र मिला, जिसमें उनसे 12 लाख रुपये की रंगदारी की मांग की गई थी और एक नवंबर तक रंगदारी नहीं पहुंचाने पर उनके बेटे व पौते को जान से मारने की धमकी दी गई थी। रोहड़ाई थाना पुलिस ने उपाध्यक्ष की शिकायत पर केस दर्ज करने के बाद जब पत्र की जांच शुरू कर दी थी जिसमें सीताराम पर ही शक हुआ और उससे सख्ताई से पूछताछ की गई तो उसने पत्र भेजकर रंगदारी मांगने की बात कबूल कर ली।
पहले भी लिखा था रंगदारी के लिए पत्र
शनिवार को सीआईए थाना में पत्रकारों से बातचीत में डीएसपी सतपाल यादव ने बताया कि मामले की सूचना मिलने के तुरंत बाद रोहड़ाई थाना पुलिस व रेवाड़ी सीआईए की अलग-अलग टीमें बनाकर मामले की जांच शुरू कर दी गई थी। पत्र में चकरपुर निवासी जिन दो लोगों के नाम दिए वे जांच में सही नहीं मिले। इसके बाद ही सीताराम पर शक की सुई घूमी थी। हालांकि उसका प्रयास था कि उसकी भूमिका इस मामले में मध्यस्थ की बन जाएगी और उस पर शक भी नहीं होगा। पुलिस पूछताछ में आरोपी सीताराम ने बताया कि उसने 20 अक्तूबर को भी रंगदारी का पत्र भेजा था जो कि संभवत: उनको नहीं मिला। इसके बाद ही उसने दोबारा धमकी का पत्र भेजा था।
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कर्ज चुकाने के लिए तैयार किया प्लान
डीएसपी ने बताया कि सीताराम पर काफी कर्जा हो गया था और आय सीमित होने के कारण उस पर कर्ज का बोझ कम नहीं हो रहा था। इसलिए उसने रंगदारी की कहानी गढ़ी और इसके लिए उन्होंने अपने ही खासमखास भाजपा उपाध्यक्ष को चुना। सीताराम गांव से रोजाना गुरुग्राम के सेक्टर-14 में लैब पर नौकरी करने के लिए जाता था। उसने रंगदारी का पत्र भी गुरुग्राम रेलवे स्टेशन पर बैठकर लिखा था। उसने पूछताछ में बताया कि रंगदारी उसने कर्ज के नीचे दबे होने के कारण मांगी थी। उसके सिर पर काफी कर्जा है।
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