फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रिंसिपल के निलंबन के बाद केएलपी कॉलेज में चला हाईवोल्टेज

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

रेवाड़ी।
उच्चतर शिक्षा में अपना अलग स्थान रखने वाले केएलपी कॉलेज में वीरवार को चार घंटे तक हाईवोल्टेज ड्रामा चला। कॉलेज पहुंची एडहॉक गवर्निंग बॉडी को प्रिंसिपल ऑफिस पर ताला जड़ा मिला, जिसे पुलिस को बुलाकर खुलवाया गया। इसके बाद भी मामला गर्माता रहा। उल्लेखनीय है कि बुधवार को प्रिंसिपल अशोक कुमार को निलंबित कर दिया था।
गौरतलब है कि पब्लिक एजुकेशन बोर्ड के तहत शहर की चार नामी शिक्षण संस्थाएं संचालित हैं। जिसमें केएलपी कॉलेज में करीब 3000 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। दरअसल केएलपी कॉलेज में चुनाव को लेकर विवाद चल रहा था, इसके बाद एडहॉक गवर्निंग बॉडी ने प्रिंसिपल अशोक कुमार को निलंबित कर दिया। वीरवार को कॉलेज पहुंची एडहॉक की टीम को प्रिंसिपल ऑफिस पर ताला जड़ा मिला, जिसे पुलिस को बुलाकर खुलवाया गया। निलंबित प्रिंसिपल भी ऑफिस पहुंचे और रोज की तरह अपनी कुर्सी पर बैठ गए। एडहॉक कमेटी ने प्रिंसिपल को कुर्सी छोड़ने के लिए कहा तो प्रिंसिपल अशोक कुमार ने एडहॉक कमेटी के गठन पर ही सवाल खड़े कर दिए। इस दौरान एक अन्य प्रशासक डॉ. एलएन शर्मा भी कॉलेज पहुंच गए। उल्लेखनीय है कि पब्लिक एजुकेशन बोर्ड के चुनाव नहीं होने के चलते कॉलेज प्रबंधन का जिम्मा एसडीएम को दिया हुआ है। जबकि डॉ. एलएन शर्मा स्वयं को कॉलेज का प्रशासक बता रहे हैं। मामले की जड़ अधिकारों को लेकर ही है। कॉलेज में तनाव बढ़ने के चलते मॉडल टाउन एसएचओ रामकुमार एवं सब इंस्पेक्टर वीना राणा पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात रहे। करीब दोपहर एक बजे सभी पक्षों के जाने पर मामला शांत हुआ।
विज्ञापन


अधिकारों को लेकर 2016 से है विवाद
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की ओर से गठित एडहॉक कमेटी का प्रधान पूर्ण चंद भट्टे वाले को नियुक्त किया हुआ है। कमेटी की ओर से बुधवार को प्रिंसिपल अशोक कुमार का निलंबन कर दिया गया था। सुबह नौ बजे पूर्ण चंद भट्टे वाले एवं कमेटी के अन्य सदस्य कॉलेज पहुंचे। प्रिंसिपल अशोक कुमार भी परिवार के साथ कॉलेज पहुंचे। यहां ताला बंद होने का कारण चाबी का गुम होना बताया। ताला तोड़ने के बाद अशोक कुमार जहां अपने आपको प्रिंसिपल बताते रहे। वहीं एडहॉक कमेटी ने उन्हें निलंबन की बात कहकर कुर्सी छोड़ने को कहा। इतना ही नहीं इसके बाद विवाद प्रशासक को लेकर भी हुआ। लेकिन कॉलेज में एसडीएम के नहीं पहुंचने के कारण तनाव बना रहा। उल्लेखनीय है कि 2016 से पीइबी के चुनाव नहीं होने के चलते कॉलेज में प्रशासक नियुक्त है।

अभी प्रशासक पर भी टकराव
केएलपी कॉलेज में प्रिंसिपल ही नहीं प्रशासक पर भी टकराव बना हुआ है। एक ओर जहां एसडीएम को प्रशासक बताया जा रहा है वहीं डॉ. एलएन शर्मा कोर्ट में स्टे की बात कहकर अपने आपको प्रशासक बता रहे हैं। वीरवार को हुए घटनाक्रम के दौरान डॉ. एलएन शर्मा मौके पर पहुुंच गए थे, लेकिन एसडीएम के नहीं पहुंचने के चलते मामला सिरा नहीं चढ़ सका। उधर, एसडीएम ने भी माना है कि हाईकोर्ट के स्टे के बाद अब उनकी जिम्मेदारी केवल चुनाव कराने की रह गई है।

एमडीयू ने बनाई फिर आईजीयू ने गठित की
कॉलेज के कामकाज को बेहतर ढंग से चलाने के लिए वाइस चांसलर एमडीयू रोहतक ने छह सदस्यों की एडहॉक गवर्निंग बॉडी की तीन माह की नियुक्ति की। इनमें डॉ. एलएन शर्मा प्रधान, एडवाकेट दीपक यादव उप प्रधान, दीपक गुप्ता महासचिव, दिलीप तनेजा कोषाध्यक्ष तथा एडवोकेट आरपी मुदगिल और मुकेश गुप्ता को सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया। इसका कार्यकाल 26 जुलाई 2017 को पूरा होना था। इस दौरान ये कॉलेज इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी मीरपुर के अधीन आ गए। कमेटी का कार्यकाल पूरा होने के बाद आईजीयू ने एडहॉक गवर्निंग बॉडी को तीन माह के लिए नियुक्त किया। इसमें पूर्ण चंद भट्टेवाला प्रधान, एडवोकेट दीपक यादव उप प्रधान, दीपक गुप्ता महासचिव, रिपुदमन गुप्ता कोषाध्यक्ष तथा दिलीप तनेजा को सदस्य के रूप में शामिल किया।

मुझे स्टेट रजिस्ट्रार ने अपोइंट किया था, इसमें गवर्निंग बॉडी की पावर एक्सरसाइज करने और इसके चुनाव की जिम्मेदारी थी। लेकिन बाद में हाईकोर्ट से गवर्निंग बॉडी की पावर एक्सरसाइज करने को लेकर स्टे आ गया। अब मेरे पास केवल चुनाव की जिम्मेदारी है। -कुशल कटारिया, एसडीएम, रेवाड़ी

जो एडहॉक कमेटी बनाई गई है। यह सही नहीं है। मैंने इसके लिए वीसी को लेटर भी लिखा है, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला है। वीसी का लेटर आने के बाद ही एडहॉक कमेटी को सही माना जाएगा। तब तक मैं ही प्रिंसिपल हूं। -अशोक कुमार, प्रिंसिपल
विज्ञापन


एडहॉक कमेटी ही सही नहीं है तो कॉलेज खर्चों में एडहॉक कमेटी के साइन क्यों कराए गए। इसलिए एडहॉक कमेटी की वैधता को चैलेंज देने पर प्रिंसिपल स्वयं ही फर्जीवाड़े में फंस जाएंगे। -दीपक गुप्ता, महासचिव, एडहॉक कमेटी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें