संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। एमडीडी ऑफ इंडिया की टीम की ओर से बाल श्रम की शिकायत मिलने पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिक यूनिट की ओर से अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान अलग-अलग दुकानों पर बाल श्रम कर रहे 4 बच्चों को टीम ने मानव तस्करी विरोधी इकाई व जिला बाल संरक्षण इकाई के सहयोग से रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति रेवाड़ी में पेश किया। जहां इन सभी 4 बच्चों की काउंसिलिंग की गई।
गौरतलब है कि कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन के तत्वावधान में काम कर रही एमडीडी ऑफ इंडिया न्याय तक पहुंच कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे बचपन बचाओ आंदोलन के तहत बुधवार को रेवाड़ी में बाल श्रम के खिलाफ रेस्क्यू अभियान चलाया गया।
इस कार्रवाई में मानव तस्करी विरोधी इकाई से प्रधान सिपाही परवीन कुमार, ईएचसी राजीव, कांस्टेबल सुनील कुमार, एमडीडी ऑफ़ इंडिया संस्था से तुषार शर्मा और विजयलक्ष्मी जिला बाल संरक्षण इकाई से प्रदीप कुमार मौजूद रहे। एमडीडी ऑफ इंडिया से पीड़ित सहायक समन्वयक संयोजक तुषार शर्मा और विजयलक्ष्मी ने बताया कि बाल श्रम एक कानूनन अपराध है और जो कोई भी बच्चों से बाल श्रम करवाता है उसे सजा के साथ जुर्माना भी हो सकता है।
सभी बच्चों को अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत स्कूली शिक्षा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। बाल श्रम से जुड़े अपराधों के लिए सज़ा का प्रावधान है। बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के मुताबिक, 14 साल से कम उम्र के बच्चे को किसी कारखाने या खान में काम नहीं कराया जा सकता। अगर कोई व्यक्ति 14 साल से कम उम्र या 14 से 18 साल के बीच के बच्चे को किसी खतरनाक काम में लगाता है, तो उसे एक से छह महीने की जेल हो सकती है या 20,000 से 50,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।