संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के मरीजों की पहचान के लिए जांच बढ़ा दी है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग ने 100 दिन अभियान की शुरुआत कर दी है। 66 दिन में 250 से ज्यादा गांवों में लगाए गए शिविर में अब तक 71662 लोगों की स्क्रीनिंग जांच की गई। इसमें टीबी के 34 मरीज मिले।
पिछले एक वर्ष में जिले में टीबी के 2530 मरीज मिल चुके हैंं। अभियान के दौरान टीम हाई रिस्क श्रेणी में शामिल लोगों की जांच कर रही है। इनमें पुष्टि होने पर उनका उपचार भी शुरू कराया जा रहा है। शिविर लगने से लोगों को जांच और उपचार के लिए नागरिक अस्पताल या फिर सीएचसी तक में जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। विभाग ने स्क्रीनिंग को लेकर दो मेडिकल मोबाइल यूनिट तैनात की है। प्रतिदिन एमएमयू अलग-अलग गांव में जाकर वहां पर लोगों की स्क्रीनिंग कर रही है।
एक मेडिकल यूनिट में एक ओपीडी मेडिकल ऑफिसर, 3 आशा वर्कर, 2 एएनएम, एक टीबी के सुपरवाइजर, दो कंप्यूटर ऑपरेटर व एक रेडियोग्राफर शामिल है। दो में से एक मोबाइल मेडिकल यूनिट में एक्सरे की सुविधा दी गई है, जबकि दूसरी में एक्सरे की सुविधा नहीं दी गई है। यहां लक्षणात्मक पाए गए लोगों को जहां पर एक्सरे की सुविधा है वहां भेजा जा रहा है।
रक्त सहित अन्य जांच नागरिक अस्पताल स्थित लैब में होती है। रिपोर्ट आने के बाद लोगों को पॉजिटिव व नेगेटिव के बारे में बता दिया जाता है। इसके बाद रिपोर्ट पोर्टल पर चढ़ाई जाती है और संबंधित विशेषज्ञ को भेजा जाएगा। विशेषज्ञ रिपोर्ट देखने के बाद मरीज का उपचार शुरू करेगा।
66 दिन में लगे शिविर की रिपोर्ट
शिविर में जांच 71662
एनएएटी 1218
एक्स-रे 2986
बलगम की जांच 3824
पॉजिटिव पाए गए 34
इन श्रेणी के लोगों की होगी स्क्रीनिंग
पिछले पांच साल में टीबी से ठीक हुए, पिछले तीन साल में टीबी मरीज के संपर्क में आए लोग, 60 साल से ज्यादा उम्र वाले लोग, स्मोकर, मधुमेह ीपीड़ित, बीएमआई (शरीर द्रव्यमान सूचकांक) और अन्य (रिहायशी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे, निर्माणाधीन स्थल पर काम करने वाले लोग)।
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टीबी के लक्षण
2 हफ्ते से ज्यादा खांसी, शाम के समय तेज बुखार होना, छाती में दर्द, वजन का घटना, भूख न लगना, बलगम के साथ खून आना।
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वर्जन
स्वास्थ्य विभाग टीबी की जांच को लेकर लोगों को जागरूक कर रहा है। अब 100 दिन का विशेष अभियान शुरू किया गया है जो कि 24 मार्च तक जारी रहेगा। लोगों की मौके पर ही स्क्रीनिंग की जा रही है और पुष्टि होने पर उपचार दिया जा रहा है। मरीज को चाहिए कि विशेषज्ञ द्वारा बताए गए उपचार का पूरा कोर्स करें और बीच में बंद न करें।- डॉ. दीपक वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन, रेवाड़ी।