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पुरानी वार्डबंदी से नगर परिषद के चुनाव कराने की याचिका हाईकोर्ट में खारिज

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पुरानी वार्डबंदी से नप के चुनाव कराने की याचिका हाईकोर्ट में खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। शहर की सरकार के लिए होने वाले चुनाव अदालती झमेलों में पड़ सकते हैं। नई वार्डबंदी के बाद पुरानी वार्डबंदी से चुनाव कराने की मांग को लेकर शहर के कुछ पूर्व पार्षदों द्वारा पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बैंच में दाखिल की गई याचिका वीरवार को खारिज हो गई है।
शहर के पूर्व पार्षद दलीप माटा, अशोक राव सहित अन्य पूर्व पार्षदों ने पांच दिन पहले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बैंच में याचिका दायर की थी। याचिका राज्य चुनाव आयोग द्वारा 30 मई को जारी नोटिफिकेशन को आधार बनाया था। जिसके अनुसार नगर पालिका अथवा नगर परिषद क्षेत्र में पुरानी वार्डबंदी से चुनाव कराए जा सकते हैं जहां वार्डबंदी का कार्य पूरे हुए छह माह का समय नहीं हुआ है। इसके पीछे तर्क था कि नई वार्डबंदी को लेकर विभिन्न नगर पालिका और नगर परिषद की तरफ से काफी शिकायतें मिली हुई हैं। राज्य चुनाव आयोग के इस नोटिफिकेशन को आधार बताकर शहर के पूर्व पार्षदों ने एक जुलाई को हाईकोर्ट की डबल बैंच न्यायाधीश महेश ग्रोवर और महावीर सिंधु की अदालत में याचिका लगाई थी। दायर याचिका में बताया गया था कि रेवाड़ी नगर परिषद की नई वार्डबंदी हुई है। इसे अभी तक छह माह का भी समय पूरा नहीं हुआ है। शहर के लोगों को भी इसको लेकर काफी शिकायतें हैं। त्रुटियों के चलते चुनाव पुरानी वार्डबंदी के अनुसार कराए जाएं। हाईकोर्ट ने वीरवार को इस मामले पर सुनवाई कर इसे खारिज कर दिया। न्यायाधीश ने कहा कि जब राज्य चुनाव आयोग की तरफ से यह नोटिफिकेशन है तो आप राज्य चुनाव आयोग एवं स्थानीय निकाय विभाग में जाएं। पुरानी वार्डबंदी के अनुसार चुनाव करने की मांग रखें। इसके बाद समस्या का कोई समाधान नहीं किया जाता है तो फिर अदालत के पास आइए। अदालत के इस आदेश के आधार पर अब पूर्व पार्षदों के अधिवक्ता द्वारा शुक्रवार को राज्य चुनाव आयोग एवं शहरी निकाय विभाग के निदेशक कार्यालय में इससे संबंधित मांग-पत्र लगाया जाएगा। इसके बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी कि राज्य चुनाव आयोग इस पर क्या फैसला लेता है।
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लटक सकते हैं चुनाव
नई वार्डबंदी में शहर के तमाम पूर्व पार्षदों के वार्ड बदल गए हैं जबकि पुराने शहर में वार्डों की भी संख्या कम हो गई है। इसके अतिरिक्त नई वार्डबंदी से अजा वार्डों की संख्या पांच से बढ़कर छह हो गई है। इसके अलावा नई वार्डबंदी को लेकर भी लोगों की शिकायतें अधिक हैं। इसकी वजह से कई पुराने पार्षदों को अपना पुराना घर भी बदलना होगा। इसकी वजह से तमाम पूर्व पार्षदों के समीकरण बिगड़ गए थे। ऐसे में यदि राज्य चुनाव आयोग की तरफ से लिया जाने वाला निर्णय अब आगामी कदम तय करेगा। इसके बाद ही तय होगा कि नप के चुनाव तय समय पर होंगे या लंबे खिंचेंगे।
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राज्य चुनाव आयोग की तरफ से 30 मई को एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है। उसमें कहा गया है कि जिन नगर पालिका अथवा नगर परिषद में नई वार्डबंदी हुए छह माह नहीं हुए हैं, उसमें पुरानी वार्डबंदी से चुनाव कराने संबंधी निर्देश स्थानीय निकाय विभाग को दिए हैं। इसी को आधार बनाकर हमने याचिका दाखिल की थी। अदालत ने याचिका खारिज नहीं की है अपितु पहले शहरी निकाय विभाग एवं राज्य चुनाव आयोग में अपील करने का कहा है। - दिलीप माटा, याचिकाकर्ता
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