संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। शहर की अनाज मंडी में सरसों की बड़े पैमाने पर आवक हो रही है। शुक्रवार को 160 किसानों से 2500 क्विंटल सरसों खरीदी गई। यह सरसों करीब 30 गांवों के किसानों से खरीदी गई है।
अनाज मंडी में सरसों की खरीद 15 मार्च से शुरू हुई थी। पिछले दिनों ओलावृष्टि से फसल को नुकसान पहुंचने और फसल भींगने से कटाई प्रभावित हुई। इसकी वजह से शुरुआती दौर में कम किसान आ रहे थे। अब कटाई में तेजी आने के साथ किसान सरसों लेकर मंडी में आने लगे हैं। इस सीजन में शुक्रवार को पहली बार 100 से अधिक किसानों ने अपनी फसल बेची है। सरसों की खरीद हैफेड की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य 5950 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गई है।
मौजूदा समय में सरसों की कटाई का कार्य बड़े पैमाने पर चल रहा है। अभी सभी किसान सरसों की कटाई के कार्य जुटे हुए हैं। ऐसे में अनुमान जताया जा रहा है कि अगले सप्ताह से बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल बेचने के लिए पहुंचने लगेंगे। सरसों बेचने के लिए किसानों के कम संख्या में पहुंचने का एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि पिछले दिनों ओलावृष्टि हुई थी, इसके कारण फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। जो फसल आ भी रही है, उसमें नमी देखने को मिल रही है।
एक दिन में किसान कर सकते हैं 25 क्विंटल सरसों ही बिक्री
किसानों के लिए परेशानी का एक कारण ये भी है कि एक दिन में एक किसान केवल 25 क्विंटल सरसों ही बिक्री कर सकते हैं। किसानों को गेट पास 25 क्विंटल सरसों का ही जारी होगा। गेट पास कटवाने के लिए किसानों को फसल पंजीकरण कागज, पंजीकृत किसान का आधार कार्ड, बैंक की कॉपी की एक-एक कॉपी लेकर आनी होगी। अब अगर कोई किसान तय मात्रा से ज्यादा सरसों लेकर आ गया तो बाकी सरसों अगले दिन या फिर दूसरी जगह ही बिक्री करनी पड़ेगी। वहीं सरसों की सरकारी समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी है।
मानकों के आधार पर की जा रही सरसों की खरीद
हैफेड डीएम प्रवीण शर्मा का कहना है हमारी खरीद के लिए पूरी तैयारी है। हैफेड की ओर से नैफेड के लिए मार्केटिंग सोसाइटी के माध्यम से सरसों की खरीद की जा रही है। बरसात से सरसों भीग गई है। इसलिए अभी नमी भी अधिक है। इसलिए किसान बिक्री करने में जल्दबाजी न करें। किसान अपनी सरसों की फसल को सुखाकर और साफ करके लाएं, ताकि उनको बिक्री के लिए मंडी में किसी प्रकार की दिक्कत न उठानी पड़े। सरसों में नमी की मात्रा 8 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरसों की खरीद निर्धारित मानकों से ही की जाएगी।