फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rewari News: 2500 बच्चों के स्वास्थ्य की हुई जांच, 526 में मिली खून की कमी

Fri, 21 Mar 2025 11:58 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
विज्ञापन
फोटो: 28बच्चों की खून की जांच करते कर्मचारी। स्रोत : विभाग
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

रेवाड़ी। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से पिछले 11 महीने में सभी स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इस दौरान 2500 बच्चों के खून की जांच की गई। इनमें 526 बच्चों में खून की कमी पाई गई। इन बच्चों में 7 ग्राम से कम खून पाया गया है। इसका कारण भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी बताई गई।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. विशाल राव ने बताया कि टीम ने स्कूलों जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की। बच्चों के रक्त में हीमोग्लोबिन की जांच की गई। जिन बच्चों में खून की कमी पाई गई है, उनका जिला नागरिक अस्पताल में इलाज चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, खून की कमी बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। इससे स्मरण क्षमता पर भी खराब असर पड़ता है। स्वस्थ बच्चों की तुलना में एनिमिया ग्रसित बच्चों में सीखने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे बच्चों की नजर भी कमजोर हो जाती है। अगर इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो आंखों पर दबाव बढ़ने से आंखें और कमजोर होती जाती हैं।
विज्ञापन


खून चढ़ाने की भी आ रही नौबत
जिन बच्चों में 7 ग्राम से ज्यादा खून है उन्हें दवाई दी जाती है लेकिन जिन बच्चों में 7 ग्राम से कम खून मिलता है तो उनको गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। उनको सिविल अस्पताल में रेफर किया जाता है, उनको खून भी चढ़ाया जाता है। स्क्रीनिंग के बाद ऐसे केस मिले, जिन्हें खून चढ़ाने की नौबत आई। हालांकि यह केस कम हैं। इसी तरह हकलाकर बोलने, देरी से बोलने सहित स्पीच डिले की अन्य बीमारियों के भी 511 बच्चे मिले हैं।

जांच कार्य में जुटीं 7 टीमें
डीईआईसी मैनेजर मीनाक्षी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 7 टीमों को लगाया है। 5 टीमें ब्लॉक, एक शहर व एक कोसली में जांच कार्य करती है। ये टीमें सरकारी स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की स्क्रीनिंग करती हैं। अगर कोई बीमारी निकलती है तो उनको सिविल अस्पताल के डीईआईसी सेंटर में रेफर किया जाता है।
विज्ञापन


-
वर्जन
विभाग की तरफ से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से 18 साल तक के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करना और उनका इलाज करना है। जन्म के समय दोष, बीमारियां व विकास संबंधी देरी का पता लगाने सहित उनका उपचार प्रदान करना है। इस कार्य में 7 टीमें लगी हैं।- डॉ. विशाल राव, जिला नोडल अधिकारी, रेवाड़ी।
-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें