अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। जिला की सीमा से होकर गुजरने वाले दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं। औसतन प्रत्येक साल छोटे-बड़े करीब 300 से 350 हादसे होते हैं। इनमें सैकड़ों लोगों की जान जाती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार काफी संख्या में हादसे पुल के ऊपर या इसके आसपास होते हैं। इन दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सरकारी निर्देशानुसार एनएच-8 पर आने वाले सभी पुलों के ऊपर लाइटें व ग्रील लगाई जानी थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा के बावजूद भी यह कार्य पेंडिंग है। यह कार्य नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा कराया जाना है।
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर खेड़ा बार्डर से कापड़ीवास बार्डर तक 10 ओवरब्रिज हैं। इन सभी पुलों पर अब तक लाइटें नहीं लगाई गई हैं महज धारूहेड़ा बस स्टैंड के सामने स्थित एक पुल पर खंभे खड़े किए गए हैं। दूसरा, पूरे हाईवे पर रेलिंग का काम भी किया जाना है, जिससे हादसे रोकने में मदद मिले, लेकिन ये काम भी महज 30 फीसदी ही हो पाया है। आए दिन हादसे जिंदगियां छीन रहे हैं और सुरक्षा के लिए लापरवाही भरा ये रवैया भारी पड़ रहा है।
हर साल 350 हादसे डेडलाइन खत्म होने पर अफसर जता चुके हैं नाराजगी
रोड सेफ्टी की मीटिंग में प्रशासन के आला अधिकारी अन्य विभागों के साथ ही एनएचएआई प्रतिनिधियों से भी कामों पर चर्चा करते हुए समीक्षा करते हैं। हाल में हुई मीटिंग के दौरान अफसरों ने लाइटों और रेलिंग को लेकर रिपोर्ट ली थी। इसमें लाइटों का काम 10 में से महज एक पुल पर चालू होने और उसके भी सिर्फ खंभे लगने की बात पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने काम में तेजी लाने को कहा, ताकि हादसों में कमी आ सके।
पशु और अवैध क्रॉसिंग से न हों एक्सीडेंट
हाईवे पर अवैध क्रॉसिंग और आवारा पशुओं को चढ़ने से रोकने के लिए साइड में बने नालों के अलावा कोई खास विकल्प नहीं है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति गलत जगह से हाईवे पार करने का प्रयास करता है तो एक्सीडेंट का खतरा रहता है। पशु भी हाईवे पर आ जाते हैं। इससे अचानक वाहन पर नियंत्रण नहीं होने से हादसे होते हैं। पिछले साल एनएच-71 पर गाय आगे आ जाने के कारण पिकअप पलटने से चालक की मौत हो गई थी। खेड़ा बॉर्डर से कापड़ीवास तक करीब 40 किलोमीटर के दायरे में रेलिंग लगाई जानी हैं, लेकिन अभी तक महज 50 फीसदी तक ही काम हो पाया है।
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इन पुलों पर लगाई जानी हैं लाइटें
खेड़ा बॉर्डर के निकट चांदुवास, साबन पुल, रुद्ध पुल, असाई पुल, आसलवास गांव, गढ़ी बोलनी रोड पर कसौला चौक, संगवाड़ी पुल, निखरी कट पर व धारूहेड़ा बस स्टैंड के सामने स्थित पुल पर लाइटें लगाई जानी हैं। रोशनी की व्यवस्था होने के बाद हादसे कम होंगे तथा आसपास लूट-पाट जैसी वारदातों में भी कमी की उम्मीद है।
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काम में तेजी लाई जाएगी
सभी पुलों पर लाइटें लगाई जानी हैं, मगर पहले के पुलों पर काम चल रहा था। वर्कलोड के चलते लाइटों पर काम उम्मीद के अनुरूप नहीं हो पाया। रेलिंग भी लगवाई जा रही है। हादसों से बचाव के लिए ये कदम उठाए जा रहे हैं।
- प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई।