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आतंकियों से लोहा लेते राजगढ़ का सपूत हुआ शहीद

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रेवाड़ी। जम्मू और कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में जिलेे के गांव राजगढ़ निवासी सिपाही हरीसिंह (28) देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। सेना ने परिजनों को इसकी सूचना भिजवाई है। परिजनों के अनुसार, शहीद का पार्थिव शरीर मंगलवार को दिल्ली से राजगढ़ स्थित आवास पर लाया जाएगा। यहां अंतिम दर्शनों के बाद सैनिक और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। हरीसिंह एक माह पूर्व ही छुट्टी बिताकर ड्यूटी लौटे थे। शहीद सैनिक चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर के थे। परिवार में इकलौते कमाने वाले थे। घर में उनकी मां के अलावा पत्नी और बेटा है।
शोक में डूबा गांव
पुलवामा में चालीस सीआरपीएफ जवानों की शहादत से शोक में पहले से डूबे बावल उपमंडल के ग्रामीणों को जैसे ही राजगढ़ निवासी सिपाही हरीसिंह के शहीद होने की खबर मिली तो सभी आंखें नम हो गई लेकिन चेहरे पर बदले के भाव भी दिखाई दिए। हरिसिंह अप्रैल 2011 में राष्ट्रीय राइफल में भर्ती हुए थे। हरीसिंह इन दिनों जम्मू-कश्मीर में 20 ग्रेनेडियर बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात थे। अभी पुलवामा में देश की सरहद पर मुस्तैद थे। शहीद के चचेरे भाई रणजीत ने बताया कि पार्थिव शरीर हवाई मार्ग से दिल्ली लाया जाएगा। गांव में आसपास के लोगों के अलावा जन प्रतिनिधियों का आना जाना शुरू हो गया।
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पूर्व सैनिक का बेटा था हरीसिंह
शहीद हरीसिंह के पिता अगड़ी सिंह भी सैनिक थे। सेना में रहकर देश की सेवा की और सेवानिवृत्त के बाद बेटे को भी सेना में भर्ती कराने के लिए स्वयं अभ्यास कराया। स्व. अगड़ी सिंह देश सेवा के प्रति समर्पित थे। समाज सुधार के कार्यों में भी आगे रहते थे। यही वजह थी कि उन्होंने बेटे हरीसिंह को सेना में भर्ती कराया।
शहीद हरीसिंह का विवाह महेंद्रगढ़ जिले के गांव झगड़ौली निवासी राधाबाई के साथ 2 फरवरी वर्ष 2016 में संपन्न हुआ था। 16 अप्रैल 2018 को उनके घर बेटा पैदा हुआ था। बेटे का नाम लक्ष्य चौहान है। बेटे के जन्म पर गांव में धूमधाम से कुआं पूजन किया गया था। विवाह के बाद से ही परिवार के सदस्य बेहद खुशी से जीवन यापन कर रहे थे। हरिसिंह कहा करता था कि जिस तरह मेरे पिता ने मुझे देश सेवा के लिए तैयार किया, वैसे मैं भी अपने बेटे को सेना में अफसर बनाने का प्रयास करूंगा।
पुलवामा हमले के बाद पत्नी से शनिवार को बोला था- आतंकियों का सफाया कर लौटूंगा
शहीद की पत्नी राधा ने बिलखते हुए बताया कि शनिवार को उनके पति से बातचीत हुई थी। बता रहे थे कि वहां के हालात बहुत खराब है। अपने चालीस सैनिकों को खोने के बाद सेना ने आतंकियों का सफाया करने की ठान ली है। जल्द ही आतंकियों का खात्मा कर घर लौटूंगा
सेवा मेडल से सम्मानित
सेना द्वारा 13 नवंबर 2018 को आतंकवादियों के खिलाफ पुलवामा में ही लॉन्च किए गए ऑपरेशन बहादुरी में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों को दबोच कर बहादुरी का परिचय दिया था। हरीसिंह की बहादुरी पर के लिए सेेना द्वारा दिसंबर माह में उन्हें सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।
रेवाड़ी में अब तक 150 शहीद
वीरों के खान के नाम से पहचाने जाने वाले जिले रेवाड़ी में अब तक करीब 150 सैनिक देश सेवा में प्राणों की कुर्बानी दे चुके हैं। जिले के लूखी गांव को सैनिकों के गांव के नाम भी जाना जाता है। गांव के हर दूसरे घर में एक युवक सेना में भर्ती होकर देश सेवा में तैनात है।
घर में भोलू नाम से पुकारते थे
स्वभाव से बेहद शरीफ, मिलनसार हरीसिंह को गांव के लोग-दोस्त और परिजन भोलू नाम से पुकारते थे। हंसमुख स्वभाव होने के कारण उनके साथ बिताये पलों को याद कर न केवल हरिसिंह के दोस्त बल्कि आस-पड़ोस के बच्चे भी मायूस नजर आए।
गांव में हरीसिंह की पहचान हर किसी के सुख-दुख में आगे रहने वाले व्यक्ति की थी। जब भी छुट्टी आते तो सभी से मिल-जुलकर जाते थे। खेल-कूद खासकर दौड़ना उन्हें ज्यादा पसंद था। मेरे भाई भी उनके साथ ही ड्यूटी पर तैनात थे। भाई से बात करते थे तो हरीसिंह से भी बात हो जाती थी। पुलवामा हमले के बाद आतंकियों के खात्मे की ही बात जुबां पर थी।
-दिनेश कुमार, पंच
शहीद हरीसिंह बचपन से मित्र उनके रहे। सुबह की सैर साथ-साथ करते थे। सेना में भर्ती का उन्हें बचपन से शोक रहा। युवा अवस्था में जहां भी भर्ती होती, जरूर आवेदन करते। दोनों इकट्ठे अभ्यास करते थे। मित्र के जाने का दुख है लेकिन उससे ज्यादा गर्व कि देश सेवा के लिए उन्होंने प्राण न्यौछावर कर दिए।
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-विनोद कुमार
अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटा प्रशासन
शहीद सैनिक हरिसिंह के अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीणों के साथ-साथ जिला प्रशासन भी तैयारी में जुट गया है। उपमंडल अधिकारी कुशल कटारिया, डीएसपी अनिल कुमार व बीडीपीओ बावल टीम के साथ दोपहर करीब 12 बजे गांव में पहुंचे। गांव के बाहर मुख्य रोड पर स्कूल के समीप ही करीब 15 वर्ष पहले शहीद हुए वेदपाल की प्रतिमा के समीप ही अंतिम संस्कार के लिए स्थान का चयन कर साफ-सफाई शुरू करवाई गई है।
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