कुमरोधा पंचायत: पर्यावरण संरक्षण में मिसाल, अपराधमुक्त भी है गांव
अमर उजाला ब्यूरो
जाटूसाना। बहुत पुरानी कहावत है कि एकता में बल है अर्थात मिलकर काम किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। गांव कुमरोधा के लोगों ने एकता, प्रेम व भाईचारा का परिचय देकर ग्राम पंचायत का साथ दिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि पंचायत को कृषि मंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के लिए हरा और अपराधमुक्त गांव के लिए केसर स्टार दिया। इस पुरस्कार के साथ ही गांव कुमरोधा की पंचायत न केवल इस प्रकार ईनाम पाने वाली चार ग्राम पंचायतों में शामिल हो गई, बल्कि दूसरी पंचायतों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
खंड जाटूसाना के गांव कुमरोधा 2700 की आबादी वाला गांव है। यहां के लोगों में गांव के लिए बेहतर करने की ललक है। वे गांव के लिए बहुत कुछ करना चाहते हैं और कर भी रहे हैं। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाया। लोगों को जागरूक भी किया, जिसका बेहतर परिणाम सामने आया। आज गांव में लिंगानुपात बराबर है। मतलब बेटियों को पूरा हक मिला है। इसी प्रकार ग्रामीणों ने मिलकर पर्यावरण बचाओ अभियान चलाया। समूह बनाकर लोगों ने गांव में पौधरोपण कर उसे हरा-भरा बना दिया। गांव में हरियाली होने से उसकी छटा देखते ही बनती है। गत वर्ष ग्रामीणों ने 100 पौधे लगाए थे, लेकिन इस बार 200 से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रामीणों का कहना है कि पौधरोपण से कई लाभ हैं। इनसे जहां गांव की सुंदरता बढ़ती है, वहीं स्वच्छ वातावरण भी मिलता है। गांव में पौधरोपण का काम बहुत पहले से चल रहा है। ग्रामीणों का सहयोग है तो ग्राम पंचायत भी विकास कराने में पीछे नहीं है। पंचायत ने गांव में पीने के पानी की अच्छी व्यवस्था कराई हुई है। गंदे पानी की निकासी की अक्सर समस्या रहती है, लेकिन गांव कुमरोधा में यह भी नहीं है। ग्रामीणों ने आपसी प्रेम व भाईचारा की भी मिसाल कायम की हुई है। गांव में कभी आपसी झगड़ा नहीं होता। यही कारण है कि गांव के किसी व्यक्ति का कोई केस नहीं है। कृषि मंत्री ने गांव में पर्यावरण संरक्षण व अपराधमुक्त बनाने को लेकर पंचायत को टू-स्टार पुरस्कार से नवाजा है।
-------------------
लिंग अनुपात बड़ी समस्या बनती जा रही है। इसलिए कदम उठाते हुए पंचायत ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान कर लोगों को जागरूक किया गया। आज स्थिति यह है कि लोग कन्या भ्रूण हत्या को पाप समझते हैं। लड़कियों के पैदा होने की खुलकर खुशी मनाई जाती है। कुंआ पूजन व प्रीतिभोज भी कराया जाता है। इससे सामाजिक स्तर पर जागरूकता आई है। सूबे सिंह
----------------
पहले गांव में पीने की पानी की समस्या बनी रहती है। आए दिन ग्रामीण क्षेत्र में पानी की समस्या को लेकर रोड जाम किए जाते थे लेकिन अब पंचायत की तरफ समस्या के समाधान के लिए की गई पहल बाद गांव को भरपूर मात्रा में पानी उपलब्ध हो रहा है। ग्राम पंचायत ने पानी की व्यवस्था बहुत अच्छी कराई हुई है। ग्रामीण भी पंचायत का पूरा सहयोग करते हैं। ग्रामीणों के सहयोग व पंचायत की विकास की सोच के कारण ही उनकी पंचायत को पुरस्कार मिला है। गांव में गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था कराई हुई है। - रामकिशन
------------------
गांव के लोग प्रकृति को बहुत प्यार करते हैं। उन्हें गांव के सुंदर दिखाई देने की भी चाहत है, इसलिए लोग जहां सफाई आदि करते रहते हैं, वही पौधरोपण में भी बहुत आगे हैं। गत वर्ष ग्रामीणों ने अभियान चलाकर 100 पौधे लगाए थे। पौधों की देखभाल भी की गई। आज सभी पौधे बड़े हो रहे हैं। इस वर्ष 200 से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। गांव हराभरा होने के कारण ही पंचायत को पर्यावरण के लिए हरा पुरस्कार मिला है। - रतनलाल
------------------
यह पुरस्कार गांव के सभी लोगों के सहयोग से मिला है तथा ग्रामीणों ने विकास कार्यों से लेकर सामाजिक अभियानों में भी बढ़ चढ़कर भागीदारी निभाई है। पंचायतें विकास तो कराती है, लेकिन यदि ग्रामीणों का सहयोग मिल जाए तो विकास दो गुना हो जाता है। गांव में हर वर्ष बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं तथा बाबा भैंया मंदिर के समीप बना पार्क गांव की शोभा है। लड़ाई झगड़ों के मामलों को भी आपसी स्तर पर निपटा लिया जाता है। - अन्नू देवी, सरपंच।
------------------