गर्मी बढ़ने के साथ खोल खंड में बढ़ने लगा पेयजल संकट
अमर उजाला ब्यूरो
खोल।
गर्मी बढ़ने के साथ ही खोल खंड क्षेत्र में पेयजल संकट भी अपना असर दिखाने लगा है। तापमान के 40 डिग्री पहुंचने ही डार्क जोन में जा चुके इस क्षेत्र में जोहड़ और तालाब भी सूख चुके हैं जिनको भरने की सुध अभी तक प्रशासन ने नहीं ली है। खंड के एक दर्जन के गांवों में भूमिगत जल खारा और लवणीय है। यह पीने के योग्य नहीं है। साथ-साथ कृषि के लिए भी उतना लाभकारी नहीं है। इस क्षेत्र के अधिकांश गांवों में भूमिगत जल स्तर 400 फीट से अधिक पहुंच चुका है, इस कारण किसान अपनी अच्छी फसल से सदा वंचित रहता है। हालांकि सरकार की तरफ से कैनाल बेस स्कीम के तहत विभिन्न गांवों में जलघर का कार्य प्रारंभ किया हुआ है लेकिन अभी उनका काम चल रहा है जिसकी वजह से अगले साल तक ही उनके माध्यम से पानी मिलने की संभावना है। अब हालात यह है कि लोगों को पीने के लिए पानी के लिए भूमिगत नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है जो कि गर्मी बढ़ने के साथ पानी देना भी कम कर देते हैं। इससे गांवों में टैंकर मंगाकर ही काम चलाना पड़ता है। हालांकि नलकूपों के माध्यम से पेयजल की सप्लाई होती है लेकिन यह अधिक समय नहीं होती है जिसकी वजह से पानी का संकट बढ़ जाता है अब एक माह से ग्रामीणों को बेहद कम मात्रा में पानी मिल रहा है।
नहरी पानी पर टिकी है आसपास
गांव मनेठी, पाड़ला, खोल, नांधा, बलवाड़ी, मायण, खालेटा, मामड़िया, आलियवास, भठेड़ा, मूंदी, नांगल, प्राणपुरा, चिमनावास, कढू, खोरी, पाली, गोठड़ा गांव पहाड़ों से घिरे हैं। यहां भूमिगत पानी खारा है जो पीने योग्य नहीं है लेकिन फिर भी लोग जैसे-तैसे कर काम चला रहे है। इन गांवों के लिए सरकार की तरफ से 55 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है ऐसे में अब इन गांवों के लोगों की आस नहरी पानी पर टिकी हुई है।
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नि:संदेह रूप से सरकार ने प्रयास किए हैं लेकिन इस गर्मियों को लेकर सरकार की तरफ से व्यवस्था की जानी चाहिए थी कि गांवों के जोहड़ों को नहरी पानी से भरा जाए। क्षेत्र को अभी न तो नहरी पानी पीने के लिए मिलता है और न ही सिंचाई के लिए। गर्मियों में दिक्कत बहुत बढ़ जाती है। - अमित कुमार
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गर्मियों के दौरान यहां के जोहड़ों एवं तालाबों को भरा जाना बेहद जरूरी है। अब गांवों के तमाम जोहड़ सूख चुके हैं जिसकी वजह से यहां की अरावली की पहाड़ियों में घूमने वाले जानवरों को भी पानी नहीं मिल पाता है। इसलिए सरकार सभी जोहड़ों को भरवाने की व्यवस्था करे। - पितांबर सेन।
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गर्मियों के दौरान पेयजल संकट के साथ बिजली संकट भी बहुत अधिक बढ़ जाता है। अब गांवों में बिजली समय पर नहीं आने से पानी के लिए रात-रातभर जागकर इंतजार करना पड़ता है। पेयजल आपूर्ति का समय भी घटा दिया जाता है। - श्रीपाल सिंह
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खोल खंड क्षेत्र के डार्क जोन में होने के कारण यहां के लोग पूरी तरह से सरकार द्वारा की जाने वाली व्यवस्था पर निर्भर है। ज्यादातर नलकूप जवाब देने की स्थिति में पहुंच चुके हैं इसलिए गांवों में टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाया जाए। - सुनील राव
कोट
गर्मी के मद्देनजर पेयजल संकट पर हमारा पूरा ध्यान है तथा किसी भी गांव में पेयजल संकट होने पर तुरंत ही समस्या का समाधान किया जा रहा है। खोल के लिए हमने विशेष व्यवस्था की हुई है ताकि किसी भी गांव में अधिक संकट होने पर वहां टैंकर से पानी सप्लाई किया जा सके। इसके अलावा खोल के लिए 44 करोड़ रुपये की लागत से नहरी पेयजल योजना पर काम चल रहा है जो कि जल्द ही पूरी हो जाएगी।
- रविंद्र गोठवाल, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।