रफ्तार नहीं पकड़ रहा गेहूं का उठान
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी
मौसम में सुधार के बाद रेवाड़ी मंडी में गेहूं की उठान में तेजी नहीं आई है। आलम यह है कि अभी भी मंडी में डेढ़ लाख से अधिक बैग पड़े हैं। इस वजह से बिक्री के लिए आने वाले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह कोसली मंडी में भी आवक के मुकाबले अभी तक आधे गेहूं का उठान नहीं हो पाया है। इससे खरीद व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। परेशान किसान सुबह सवेरे ही मंडियों में पहुंचने लगते हैं।
बारिश की वजह से नमी बनी परेशानी
इस पखवाड़े में दो बार बारिश हो चुकी है। इस वजह से खरीदा गया गेहूं काफी भीग गया है। गेहूं की बोरियों के भीगने की वजह से उनमें नमी की मात्रा काफी अधिक है। इस कारण इनको गोदामों में नहीं उतारा जा रहा है। इसी वजह से मंडी से भी इनका उठान बेहद धीमी गति से किया जा रहा है। आलम यह है कि 2 अप्रैल से अब रेवाड़ी मंडी में करीब ढाई लाख बैग की खरीदारी की गई है। इससे अभी तक महज एक लाख बैग का ही उठान हो पाया है। धीमी गति से हो रहे उठान की वजह से जहां व्यापारियों की फड़ों पर पैर रखने तक की जगह नहीं है वहीं तय शेड्यूल के अनुसार गेहूं लेकर आ रहे किसानों को मंडी में जगह तक नहीं मिल पा रही है। ऐसे में उनको अपनी उपज को सड़क पर ही फैलना पड़ रहा है। इससे बारिश आने के दौरान नुकसान का भी डर बना रहता है। वहीं व्यापारियों की मुश्किल यह है कि समर्थन मूल्य पर खरीदे गेहूं का उठान नहीं हो रहा है। इस वजह से जो किसान सरसों खुले भाव में बेचना चाहते हैं वह भी नहीं आ पा रहा है। मजबूर व्यापारी भी अपने स्तर पर ही कट्टों का उठान करा रहे हैं। वहीं कोसली में अब तक करीब 65 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद की गई है लेकिन उसके मुकाबले उठान अभी तक 50 हजार बैग का ही हो पाया है। कोसली मंडी में तो स्थिति यह है कि बड़ी मात्रा में गेहूं खुले में पड़ा हुआ है। बारिश आने के दौरान यह भीग भी गया था। खरीद एजेंसियों के तमाम दावों के बावजूद भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।
------------
मंडी में उठान व्यवस्था फिर बिगड़ गई है। अभी भी डेढ़ लाख के करीब गेहूं के बैग पड़े हैं। जिस तेजी से उठान होना चाहिए वह नहीं हो रहा है। परेशानी व्यापारियों को अपने स्तर पर ही इनका उठान करवाना पड़ रहा है। - राधेश्याम मित्तल, प्रधान नई अनाज मंडी व्यापार मंडल
-----------
हमारा उठान पर पूरा ध्यान है लेकिन व्यवस्था में काफी समय लग जाता है। गोदामों में गेहूं को उतारकर उनमें दवा भी देनी पड़ती है जिससे समय लग जाता है। इसके बावजूद भी प्रतिदिन आठ से दस हजार बैग का उठान किया जा रहा है। - राजेंद्र सिंह, खरीद अधिकारी वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन