फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रतिबंध के बावजूद तूड़ी से चलाए जा रहे हैं ईंट भट्टे

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रतिबंध के बावजूद तूड़ी से चलाए जा रहे हैं ईंट भट्टे
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
जिले में ईंट भट्टा मालिकों द्वारा सरेआम एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रोक के बावजूद जिले में तूड़ी का उपयोग कर ईंट भट्टे चलाए जा रहे हैं। जिससे ग्रामीणों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार को ग्रामीणों ने उपायुक्त को शिकायत कर प्रशासन से ऐसे भट्टा संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ढाणी सुंदरोज सरपंच राजेश कुमार व सुंदरोज सरपंच की अगुवाई में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने वालों में विजयपाल, पल्लूराम, शीशराम, जसराम, गणपत सिंह, राजेश कुमार, राजेंद्र सिंह व रवि कुमार ने बताया कि एनजीटी के आदेश बाद जिले में 25 सितंबर से तूड़ी से ईंट पकाने वाले भट्टों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की तरफ से सिर्फ जिग-जैग सिस्टम स्थापित करने वाले भट्टों का संचालन करने की अनुमति दी गई है। जिसमें ईंट पकाने में कोयले का उपयोग करना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 200 से अधिक ईंट-भट्टे हैं और जिग-जैग सिस्टम लगाने वाले ईंट-भट्टों की संख्या 30 के लगभग है। अब प्रशासन की नकेल ढीली पड़ते ही जिन भट्टा संचालकों ने जिग-जैग सिस्टम नहीं लगाया है वे भी सरसों की तूड़ी का उपयोग करके गुपचुप तरीके से भट्टे चला रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

----
यहां चलाए जा रहे हैं तूड़ी से भट्टे
सुंदरोज और आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में भट्टे हैं जो कि तूड़ी का उपयोग धड़ल्ले से करते हुए ईंट पका रहे हैं। जिसकी वजह से प्रदूषण का स्तर पहले जितना हो गया है। इसके अलावा बावल के रसियावास रोड पर भी तूड़ी से ईंट भट्टे चलाए जा रहे हैं। इस संबंध में वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों के साथ ही खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को भी शिकायत कर चुके हैं। लेकिन किसी भी विभाग की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही है। दोनों ही विभाग जानबूझकर चुप्पी साधे हुए हैं, जिसकी भी जांच होनी चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें