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1980 में बने जिले के पहले औद्योगिक सेक्टर-11 में 40 साल बीतने के बाद भी बुनियादी सुविधाएं नहीं

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शहर के दिल्ली रोड स्थित राव तुलाराम स्टेडियम के पीछे 40 साल पहले बने जिले के पहले औद्योगिक सेक्टर-11 में आज तक जिम्मेदार बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करा पाएं है। इसके चलते यहां पर 80 में से 3-4 फैक्ट्रियां ही संचालित हो रही हैं। सड़क, सीवर और पेयजल जैसी मूूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने के चलते उद्योगपति यहां से पलायन कर चुके हैं। जबकि 1980 में इस औद्योगिक सेक्टर का निर्माण देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले मेटल उद्योग को बढ़ावा देने के लिये किया गया था। हालात इतने खराब हैं कि 40 वर्ष बीतने के बाद भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) व एचएसआईआईडीसी (हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं संरचना विकास निगम लिमिटेड) के अधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर अपनी पल्ला झाड़ रहे हैं।
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वर्ष 2017 में एचएसीवीपी से एचएसआईआईडी को ट्रांसफर करने का दावा
रेवाड़ी के साथ दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित धारूहेड़ा में औद्योगिक सेक्टर विकसित किया गया था, यहां पर भी रेवाड़ी जैसी ही समस्याएं थीं, लेकिन अब यहां पर पहले के मुकाबले हालातों में सुधार हुआ है। हालांकि अभी भी उम्मीद के मुताबिक काम होना बाकी है। धारूहेड़ा में भी 350 औद्योगिक प्लाटों में से करीब 140 में ही फैक्ट्रियां ही चल रही हैं। जबकि भौगोलिक स्थिति के हिसाब से यहां पर व्यवसाय के लिए बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं।
1980 से शुरू हुआ था औद्योगिक सेक्टर विकसित करने का काम
औद्योगिक सेक्टर विकसित करने का काम जिले में 1980 से शुरू हुआ। 1984-85 में कुल 77 लाख रुपये का निवेश जिले में हुआ। इसके बाद हर साल 50 से 60 यूनिट्स बढ़ती चली गई। 1995 के बाद तो यहां यूनिट्स लगाने के लिए एकदम होड़ लग गई। वर्तमान में यहां करीब 11200 लाख रुपये का निवेश है, लेकिन अधिकतर फैक्ट्री बावल औद्योगिक क्षेत्र तक ही सिमट कर रह गई हैं। यदि जिम्मेदारों ने सुध ली होती तो हालात ज्यादा बेहतर हो सकते थे।
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औद्योगिक सेक्टर-11 के रखरखाव की फाइल एचएसआईआईडी को ट्रांसफर कर दी गई है। ऐसे में यहां पर सुविधाओं के सुधार का जिम्मा भी उन्हीं पर है। पहले क्या हुआ इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।
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विजय राठी, ईओ, एचएसवीपी
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