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मिलावटखोरों पर स्वास्थ्य विभाग की कड़ी नजर

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मिलावटखोरों पर स्वास्थ्य विभाग की कड़ी नजर
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। दीपोत्सव से पहले जिला खाद्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग सख्त नजर आ गया है। दोनों विभाग अब शहर के बड़े प्रतिष्ठानों से मिठाइयों व अन्य खाद्य पदार्थों केसैंपल भर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में स्वास्थ्य विभाग अभी तक दस सैंपल भर चुका है। सोमवार को भी जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. लाल सिंह के नेतृत्व में माडल टाउन स्थित एक फ्रेंचाइजी एवं बीएमजी मॉल स्थित एक फूड कोर्ट से अलग-अलग खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे गए। माडल टाउन से खोया, बर्फी एवं रसगुल्ला तथा बीएमजी मॉल स्थित एक फूड कोर्ट से कचोरी के मसाले एवं पनीर बटर मसाला सब्जी का सैंपल भरा गया। विभाग इससे पूर्व खोल, रेवाड़ी एवं धारूहेड़ा में भी सैंपल भरने की कार्रवाई कर चुका है। दीपोत्सव से पूर्व स्वास्थ्य विभाग मिलावट खोरों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। जिले में चल रहे खाद्य पदार्थों के कारखानों पर भी स्वास्थ्य विभाग की नजर बनी हुई है। ऐसे में आम नागरिक की शिकायत पर भी इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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दीपावली से पहले आएगी रिपोर्ट
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि जिले में सैंपल जांच सुविधा नहीं होने के चलते जांच रिपोर्ट आने में देरी होती है। इसका लाभ मिलावटखोर उठाते हैं। इस बार सरकार भी मिलावट खोरों के खिलाफ सख्त है। जिन खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे जा रहे हैं, उनकी जांच रिपोर्ट दीपावली से पहले ही आ जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मिलावट खोरों के खिलाफ दीपावली से पहले कार्रवाई करने में आसानी रहेगी।
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सात साल के लिए जा सकते हैं अंदर
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी एनडी शर्मा के अनुसार प्रीवेंशन ऑफ फूड आल्ट्रेशन एक्ट-1954 के तहत मिलावट खोरों पर जुर्माने के साथ सात साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि एक्ट में इसे विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है। यदि कोई खाद्य पदार्थ मिस ब्रांड अर्थात बिना किसी लाइसेंस के पैक कर बेचा जा रहा है तो बेचने वाले पर तीन लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं यदि कोई खाद्य पदार्थ का सैंपल जांच के दौरान तय मानकों के अनुसार नहीं पाया जाता है तो बेचने वाले के खिलाफ पांच लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं यदि जांच रिपोर्ट में सैंपल अनसेफ अर्थात खाने के लिए अयोग्य पाया जाता है तो मिलावटखोर को सात साल तक सलाखों के पीछे रहना पड़ सकता है। हालांकि रेवाड़ी में अभी तक अधिकतम दो महीने की सजा ही हो पाई है।
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गत वर्ष भरे थे 40 सैंपल
गत वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने दीपोत्सव पर जिले से 40 सैंपल भरे थे। इनमें से आठ सैंपल फेल आए थे। इन पर विभाग की ओर से जुर्माना भी लगाया गया था। हालांकि अनसेफ कोई नहीं मिला। उधर, खाद्य सुरक्षा विभाग केवल खाद्य सुरक्षा अधिकारी के भरोसे चल रहा है। इन्हें कार्रवाई से लेकर कोर्ट एवं सैंपल जांच के लिए भेजने का काम इन्हें ही करना पड़ता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी प्रत्येक सीएचसी में स्वास्थ्य अधिकारी लगाया गया है। स्वास्थ्य अधिकारी भी सैंपल आदि लेने का काम कर सकता है।
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हमने जिले में 10 जगहों से सैंपल लिए हैं। सभी सैंपल लेने के बाद उसी दिन जांच के लिए लैब भेजे जा रहे हैं। अधिकतर सैंपल की जांच रिपोर्ट दीपावली से पहले ही आ जाएगी। सब स्टैंडर्ड या अनसेफ पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दीपावली तक यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। हमारा उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य का बचाना है। यदि किसी के पास किसी मिलावटखोर की जानकारी है तो हमें दे सकता है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. लाल सिंह, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, रेवाड़ी।
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