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बिजली चोरी रोकने को तीन करोड़ी डीटी मीटर बन गए कबाड़

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अमर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी।
निगम ने बिजली चोरी रोकने के लिए बेशक तीन करोड़ से ज्यादा के डीटी मीटरों की खरीद जरूर की। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण आज यह चोरी रोकने में मदद की बजाय कबाड़ में परिवर्तित होते हुए धूल फांक रहे है। जी हां, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की ओर से एक क्षेत्र विशेष में बिजली चोरी का पता लगाने के लिए ट्रांसफार्मर पर लगाए डीटी मीटर कबाड़ हो गए हैं। रेवाड़ी सर्कल की इस लापरवाही से निगम को तीन करोड़ से अधिक का फटका लगा है, क्योंकि इन डीटी मीटरों का लगने के बाद उपयोग ही नहीं हो सका। यदि अधिकारी मीटर का उपयोग करते तो ‘अमुक क्षेत्र’ में सप्लाई एवं उपभोग की गई बिजली का अंतर आसानी से पता कर कार्रवाई करना आसान हो जाता।
उल्लेखनीय है कि प्रयोग के तौर पर जिले में कुल 21400 ट्रांसफार्मर में से 3500 पर डीटी मीटर लगाए गए थे। लेकिन यह प्रयोग हवा में बनकर उड़ गया, जिसके चलते सरकार के राजस्व विभाग को सीधे तौर पर तीन करोड़ 15 लाख का चूना लग गया। इतना ही नहीं यदि इनका उपयोग किया जाता तो बिजली चोरी पर अंकुश लगने से निगम को करोड़ों का चूना लगने से बचाया जा सकता था।
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सरकार गई-आई पर सुध किसी ने नहीं ली
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कांग्रेस सरकार में बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए ट्रांसफार्मर पर डीटी मीटर लगाने की योजना शुरू की गई थी। लेकिन बड़ी बात यह है कि न तो कांग्रेस सरकार एवं न ही भाजपा सरकार में इन डीटी मीटरों की सुध ली गई। जिसके चलते टैक्स अदा करने वालों की गाढ़ी कमाई का पैसा कबाड़ बन गया। योजना के तहत कोसली के करीब 1000, रेवाड़ी में 1500 एवं धारूहेड़ा डिवीजन में एक हजार से ज्यादा ट्रांसफार्मर पर ये मीटर लगाए गऐ थे।

एक मीटर का खर्च नौ हजार
एक डीटी मीटर की कीमत करीब 9 हजार रुपये है, इसके हिसाब से करीब तीन करोड़ 15 लाख रुपये के डीटी मीटर खरीदे गए थे। लेकिन छह साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी इनका उपयोग नहीं हो पाया। सरकारी राजस्व से तीन करोड़ से अधिक का चूना लगने के बाद भी किसी सरकार एवं अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली।

चोरी के साथ ढांचे को मजबूत करना था उद्देश्य
प्रदेश भर में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड के 243122 ट्रांसफार्मर पर डीटी मीटर लगाने की योजना तैयार की गई थी। ट्रांसफार्मर से इसके जरिए मॉनिटरिंग का उद्देश्य चोरी रोकने के साथ ट्रांसफार्मर पर ऊर्जा खपत का पता कर ढांचे को मजबूत करना था। रेवाड़ी में इसके तहत ही करीब 3500 ट्रांसफॉर्मर पर ये डीटी मीटर लगाए गऐ थे। लेकिन सत्ता में आई भाजपा सरकार ने 11 मई 2016 को उदय स्कीम पर हस्ताक्षर किए। इससे फीडर पर बीस फीसदी से कम लाइनलॉस कर 24 घंटे बिजली देने की योजना शुरू कर दी गई। इसके बाद रेवाड़ी में 43 करोड़ रुपये का टेंडर छोड़कर व्यवस्था को मजबूत करने का काम शुरू किया गया।

लोग बोले अधिकारियों से हो रिकवरी
एकता मंच के अध्यक्ष थावर सिंह नाहड़ चौबीसी के प्रधान राजेंद्र सिंह का कहना है कि विभाग के अधिकारियों की वजह से ही विद्युत निगम घाटे में चल रहा है। उनका कहना है कि डीटी मीटर, एमसीबी और कैपेसिटर का न तो उपभोक्ताओं को कोई लाभ हुआ और न ही निगम को। उल्टा निगम को करोड़ों रुपये का घाटा जरूर हो गया। जिसकी क्षतिपूर्ति निगम को अधिकारियों से करनी चाहिए।
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उच्च अधिकारियों की अनुमति के बाद खराब मीटर को बदला जाएगा। वहीं अन्य डीटी मीटर की रीडिंग चैक कर सप्लाई और खपत का पता किया जाएगा। ज्यादा अंतर आने वाले स्थानों में कार्रवाई करने के साथ ही ढांचे को मजबूत करने का काम किया जाएगा।
-राजकुमार जाजौरिया, अधीक्षण अभियंता, रेवाड़ी सर्कल
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