अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी.बावल। बावल मंडल के गांव मोहनपुर से 27 जून को हुई लापता नाबालिग छात्रा की बरामदगी को लेकर रविवार को गांव के राजकीय स्कूल में बावल चौरासी और ग्रामीणों की पंचायत आयोजित हुई। पंचायत में बावल चौरासी की गठित संघर्ष समिति ने गांव के लोगों से राज्य क्राइम ब्यूरो की जांच में सहयोग नहीं करने की बात उठाई। जिसके बाद गांव की तरफ से सरपंच रणबीर सिंह ने आश्वस्त किया गांव से प्रतिदिन दो-दो लोग जनस्वास्थ्य राज्यमंत्री के आवास के बाहर चल रहे धरने में शामिल होंगे। पंचायत में वक्ताओं ने एक बार फिर जनस्वास्थ्य मंत्री के रवैये को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र का वे प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और वहां की पंचायत धरने पर बैठी होने के बाद उनका बातचीत तक नहीं करना जनता के प्रति सही रवैया नहीं है। उधर, मोहनपुर में पंचायत के बावजूद भी उनके आवास के बाहर बावल चौरासी के पदाधिकारियों का धरना 26वें दिन भी जारी रहा।
उल्लेखनीय है कि नाबालिग की गुमशुदगी की जांच कर रही है स्टेट क्राइम ब्यूरो ने चौरासी की संघर्ष समिति को संकेत दिया गया था कि मोहनपुर के ग्रामीणों द्वारा जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा गांव के लोगों की धरना स्थल पर उपस्थिति भी कम थी। इसलिए ग्रामीणों के सहयोग के लिए रविवार को मोहनपुर गांव में पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत में सरपंच ने आश्वास्त किया गया कि सोमवार से गांव के चारों मोहल्लों में से प्रत्येक से दो-दो व्यक्ति रोजाना धरना स्थल पर पहुंचेंगे। इसके साथ ही एक नवंबर को शहर बंद को सफल बनाने के लिए ग्रामीणों के साथ जनसंपर्क किया जाएगा और क्राइम ब्यूरो की टीम को भी पूरा सहयोग दिया जाएगा। गांव की बेटी की खोज के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इस अवसर पर माड़ाराम, रामकिशन महलावत, जिला प्रमुख मंजूबाला, चेतराम, ईश्वर महलावत, अर्जुन चौकन, सुमेर जैलदार, जवाहर लाल, शेरसिंह हरचंदपुर, ओमप्रकाश व सरजीत सहित अन्य मौजूद रहे।
सीबीआई से जांच कराने की अनुशंसा करे मंत्री
पंचायत में जनस्वास्थ्य मंत्री डॉ. बनवारीलाल के रवैये को लेकर नाराजगी जताई। वक्ताओं ने कहा कि राज्यमंत्री ने कहा था कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य क्राइम ब्यूरो भी इस मामले में असफल हो चुकी है इसलिए मंत्री को अपना वादा निभाते हुए इसकी जांच अब सीबीआई अथवा उसके समकक्ष की एजेंसी से कराने की सिफारिश करनी चाहिए। एक ओर तो वे पीड़ित परिवार का साथ देने की बात कहते है, दूसरी ओर बेटी बरामदगी को लेकर दिए जा रहे धरना स्थल पर एक बार आने के बाद दोबार नहीं आए है।