एंबुलेंस का नहीं खुला लॉक, जेसीबी एक घंटे बाद पहुंची
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
सुबह दस बजे आए भूकंप से शहर में अफरा-तफरी मच गई। सायरन बजते ही आनन-फानन में लोग घरों से बाहर निकल आए। देखते ही देखते सड़कों पर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां दौड़ने लगी। भूकंप से हुए हादसों में करीब नौ लोगों की मौत हो गई जबकि 24 लोग घायल हो गए। शहर में पांच और औद्योगिक क्षेत्र में दस जगह इसका ज्यादा प्रभाव देखने को मिला। राहत के लिए आई कहीं एंबुलेंस का लॉक नहीं खुला तो कहीं जेसीबी एक घंटे बाद पहुंची। सिविल अस्पताल में तो मौजूद कर्मचारी इंचार्ज का नाम नहीं बता पाए।
प्रशासनिक अमला प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में लगा था।
सुबह सायरन बजते ही लघु सचिवालय में मौजूद कर्मचारी तुरंत भागकर बाहर निकल आए। यहां भूकंप आने से रिकॉर्ड रूम में अलमारी गिरने से एक कर्मचारी की मौत और छह घायल हो गए। 10.15 पर एंबुलेंस पहुंची। 10.25 पर जाकर दमकल आई। पुलिसकर्मी और वालेंटियर्स भी अपनी-अपनी ड्यूटी में जुट गए। बचाव कार्य के दौरान एक एंबुलेंस का लॉक भी नहीं खुला। यहां की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन हेमंत ने संभाली थी। उन्होंने कर्मचारियों को गाइड लाइन दी।
बीएमजी मॉल का भी यही हाल था। यहां भूकंप से तीसरी बिल्डिंग क्षतिग्रस्त हुई। हादसे में दो लोगों की मौत और चार घायल हुए। देखते ही देखते पूरा अमला तैयारी में जुट गया। मॉल परिसर में ही घायलों को उपचार दिया गया। पुलिसकर्मी भी कागजी कार्रवाई में जुटे थे। इमरजेंसी फोन के लिए बीएसएनएल की तरफ से लैंड लाइन फोन भी लगाया हुआ था। यहां की जिम्मेदारी बावल एसडीएम और डीएसपी सुरेश ने व्यवस्था संभाली थी।
कन्या महाविद्यालय सेक्टर- 18 में भी अफरा-तफरी का आलम था। कॉलेज में परीक्षा चलने के कारण थोड़ी समस्या आई। आईटीबीपी के जवानों ने आपदा में घायल लोगों को रस्सी के सहारे नीचे पहुंचाया। यहां करीब 11.30 बजे जेसीबी पहुंची। यहां तीन लोगों की मौत हुई जबकि सात लोग घायल हुए। यहां की व्यवस्था डीएसपी अनिल कुमार ने संभाल रखी थी।
सिविल अस्पताल में अव्यवस्था का आलम था। घायल और मृतक के परिजनों की चीखें गूंज रही थी। आईटीबीपी के कमांडर ने आपदा के बाद सिविल हास्पिटल पहुंचकर वहां मौजूद कर्मियों से इंचार्ज के बारे में पूछा तो कोई कुछ नहीं बता पाया। इस भूकंप में यहां एक व्यक्ति घायल हो गया जबकि ट्रॉमा सेंटर में भी दो लोग मृत मिले। अस्पताल परिसर के गेट पर एक व्यक्ति माइक से घटना के बारे में लोगों को जागरूक कर रहा था। यहां छह टीमें तैनात थीं। अस्पताल परिसर में ही घायलों का इलाज चल रहा था।
ईडन गार्डन में भूकंप के बाद सभी को बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही एंबुलेंस, दमकल, पुलिसकर्मी सहित सभी वहां पहुंच कर राहत कार्य में जुट गए। दमकल विभाग के कर्मचारियों ने सीढ़ियों के सहारे अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला।
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कंट्रोल रूम फेल
पूरे घटनाक्रम को लेकर सचिवालय के पीछे स्थित हुडा ग्राउंड में जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (डीईओसी) बनाया गया था। यहां वायरलेस सिस्टम में तकनीकी खामी दिखी। जिससे संपर्क साधने में कर्मचारियों को बड़ी परेशानी हुई। कंट्रोल में लोगों के भी काफी फोन आए। उन्हें घटना की जानकारी दी गई।
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डीसी ने ली रिपोर्ट, कहा-कमियों को पूरा करेंगे
मॉक एक्सरसाइज के बाद उपायुक्त ने हुडा ग्रांउड में बने स्टेजिंग एरिया में पहुंचकर उपरोक्त पांच स्थान जहां पर मॉक एक्सरसाइज की गई वहां पर नियुक्त अधिकारियों से घटनाक्रम का जायजा लिया। इस मेगा मॉक एक्सरसाइज को आब्जर्व करने के लिए भारतीय सेना के कैप्टन धनंजय और आईटीबीपी के कमांडेंट लक्ष्मण यादव नियुक्त किए थे। उपायुक्त ने बताया कि इस मॉक एक्सरसाइज को चुनौती के रूप में लिया गया था। इससे आपदा प्रबंधन के लिए जुटाए संसाधनों की जानकारी मिली। इस मॉक एक्सरसाइज में संसाधनों की कमी रह गई थी उनको पूरा किया जाएगा। इससे हमें यह सीखने को मिला कि हमें आपदा के समय क्या करना है यह हमारे लिए एक पाठ की तरह सीख है। डीसी पंकज ने बताया कि इस मॉक एक्सरसाइज से हमें कई सुझाव भी मिले कि हमें अब आगे आपदा प्रबंधन के लिए किस प्रकार अलर्ट रहना है। वहीं वहां पहुंचे रेवाड़ी विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने भी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और जिला प्रशासन द्वारा उठाए आपदा प्रबंध कार्यों की सराहना की। आपदा प्रबंधन के इंसीडेंट कमांडर और अतिरिक्त उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि आपदा व भूकंप के समय जाम की स्थिति में घटना स्थल पर पहुंचने के लिए बाइक राइडर भी लगाए गए।
इस अवसर पर साउथ रेंज की पुलिस महानिरीक्षक डॉ. सीएस राव, उपमंडल अधिकारी व आपदा प्रबंधन के ओएससी कुशल कटारिया, एलएससी एवं डीआरओ आशीष कुमार, नोडल ऑफिसर व नगराधीश डॉ. विरेंद्र, एसओ एवं डीएसपी, आईएमओ सहित जिला आपदा प्रबंधन की रिसर्च अधिकारी प्रियंका, जिला फायर अधिकारी एसके सांगवान व तहसीलदार विकास मलिक सहित अन्य सभी विभागों के अधिकारी अपनी टीम सहित उपस्थित थे। इस मॉक एक्सरसाइज में माउंट एवरेस्ट विजेता आशा झांझोरिया व सुनीता चौंकन भी मौजूद रहीं।
राहत में जुटे ये
मॉक ड्रिल के लिए रेवाड़ी में पुलिस विभाग की ओर से 10 पीसीआर, पुलिस जवान, वॉकी टॉकी, ट्रैफिक पुलिस व पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, होम गार्ड की 5 टीम व 30 स्ट्रैचर, मोबाइल कार्पोरेशन की ओर से मोबाइल टॉयलेट, इक्यूपमेंट, वाटर टैंकर व जनरेटर सेट काम में आया। पब्लिक हेल्थ विभाग की ओर से वाटर टैंकर, पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से जेसीबी, रोड रोलर एवं स्टाफ, हरियाणा रोडवेज की पांच बसें, आरटीए के तीन ट्रक एवं पांच मिनी बस चालक सहित, फारेस्ट डिपार्टमेंट से दो ट्रैक्टर-ट्रॉली, 15 सदस्य, चिकित्सा विभाग की ओर से पांच एंबुलेंस, छह चिकित्सकीय स्टाफ टीम व मेडिकल पोस्ट, डीपीआरओ फोटोग्राफी, स्टेंजिंग एरिया व ईओसी, डिस्ट्रिक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की ओर से मैम्स और हैंडलिंग ऑफ रिसोर्स यूनिट, बीएसएनएल की ओर से इमरजेंसी टेलीफोन सर्विस, पशुपालन की ओर से वाहन एवं दो पशु चिकित्सक, फूड एंड सप्लाई की ओर से फूड और अन्य व्यवस्था राहत शिविर के लिए, फायर सेफ्टी ऑफिसर के लिए पांच फायर टेंडर विद स्टाफ, जिला रेडक्रॉस की ओर से पोर्टेबल टेंट और छह टीम एवं वॉलियंटर्स मौजूद रहे।
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संवेदनशील क्षेत्र में आता रेवाड़ी
रेवाड़ी जोन चार में आता है, जो संवेदनशील है। भूकंप आने पर मकान, दफ्तर या किसी भी इमारत में अगर मौजूद हैं तो तुरंत बाहर खुले में आ जाएं। खुले मैदान की ओर भागे, किसी बिल्डिंग के आसपास नहीं खड़े हों, अगर ऐसी बिल्डिंग में हैं जहां लिफ्ट है तो लिफ्ट का उपयोग बिल्कुल नहीं करें। केवल सीढ़िय़ों का ही प्रयोग करें। घर के दरवाजे और खिड़की खुला रखें। घर के सभी बिजली स्विच ऑफ कर दें। अगर बिल्डिंग बहुत ऊंची हो और तुरंत उतर पाना मुश्किल हो तो बिल्डिंग में मौजूद किसी मेज, ऊंची चौकी या बेड के नीचे छिप जाएं। डरे नहीं और किसी भी तरह की अफवाह न फैलाएं।