कैटल फ्री सिटी: सड़कों पर गोवंश का जमावड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
प्रशासन ने शहर को कैटल फ्री तो घोषित कर दिया लेकिन आज भी जिले की सड़कों पर घूमते गोवंश हादसों का कारण बन रहे हैं। प्रशासन ने पिछले वर्ष नवंबर माह में शहर को कैटल-फ्री बनाने की दिशा में बेसहारा गोवंश को पकड़ने के साथ उनके लिए फाटक तक की व्यवस्था की थी। इसके बाद शहर को कैटल-फ्री घोषित कर दिया गया। फाइलों में जिला कैटल फ्री है लेकिन सड़कों पर लावारिस गोवंश प्रशासन की पोल खोल रहा है।
सड़कों पर आराम, लगता है जाम
एक अनुमान के मुताबिक शहर की सड़कों पर करीब 500 से भी अधिक लावारिस गोवंश घूमते हैं। इनकी संख्या कम होने की बजाय अब लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि गर्मियों के दौरान ज्यादातर गोवंश दूध देना बंद कर देते हैं। इस कारण ज्यादातर पशुपालक अपने पशुओं को छोड़ देते हैं। दिनभर सड़कों पर घूमते पशुओं के कारण हादसे हो रहे हैं। प्रशासन ने नवंबर माह में शहर को कैटल-फ्री घोषित किया था, हालांकि यह दावा हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले के बाद आए आदेशों के बाद किया गया था। अब उस वक्त कुछ समय के लिए किए अमल के बाद शहर में फिर वही हालात हैं। सरकुलर रोड पर जगह-जगह खड़े लावारिस गोवंश के कारण वाहन चालकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शहर में इन बेसहारा गोवंश को लेकर एक मामला यूटिलिटी कोर्ट में विचाराधीन है, जिस पर 20 जुलाई को सुनवाई होनी है।
आनन-फानन में किया कैटल फ्री
कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद जिला प्रशासन द्वारा आनन-फानन में शहर को कैटल फ्री घोषित कर दिया गया था। जबकि नप कार्यालय परिसर में भी सरेआम बेसहारा पशुओं का जमावड़ा देखा जा सकता है। शुरूआती तौर पर दिखावा के लिए प्रशासन की ओर से करीब 150 बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशाला और अस्थायी फाटकों में भेजा था लेकिन अब वहीं स्थिति है।
कोट
नप द्वारा शहर को कैटल फ्री होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल विपरीत है। शहर की हर सड़क और बाजारों में बेसहारा गोवंश का जमावड़ा लगा रहता है। इन पशुओं के कारण आए दिन शहर में दुर्घटनाएं भी हो रही है। - सुनील भार्गव, एडवोकेट।
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कहने को हम कैटल फ्री शहर में रहते हैं, लेकिन सड़कों पर घूमते बेसहारा गोवंश ने लोगों की परेशानी बढ़ा रखी है। कैटल फ्री शहर घोषित करने वाले प्रशासन के अधिकारी कम से कम इस मामले में एक बार दोबारा भी वास्तविकता देखकर कार्रवाई करें। सरकुलर रोड पर तो चलना भी मुश्किल है। - राजेश सैनी, एडवोकेट
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सरकुलर रोड का कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं है जहां पर बेसहारा गोवंश का जमावड़ा नहीं रहता है। बाजार से लेकर मुख्य स्थानों पर बेसहारा पशुधन घूमता रहता है। इनकी वजह से कई बार लोग चोटिल हो चुके हैं।
रजनी देवी, गृहिणी
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शहर में बेसहारा घूमते पशु शहर के लोगों के लिए गंभीर समस्या है। सड़कों के बीचोंबीच खड़े पशुओं के कारण वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। सड़कों पर घूमते पशुओं को देखकर नहीं लगता कि हम कैटल फ्री शहर के निवासी है। - उपासना गुप्ता, सदस्य सीडब्ल्यूसी
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