रेवाड़ी। शहर के नागरिक अस्पताल में 100 बेड के हिसाब से 25 डॉक्टर, 64 स्टाफ नर्स व 9 नर्सिंग सिस्टर की पोस्ट चार साल में स्वास्थ्य विभाग नहीं भर पाया। ऐसे में इस पर नीति आयोग ने अब अस्पताल को पत्र भेजकर जवाब मांगा है। इतना ही नहीं आयोग की एक टीम 3 जुलाई को यहां पहुंचकर जांच लैब से लेकर डॉक्टर व अन्य स्टाफ की के बारे में रिपोर्ट तैयार करेगी।
5 मई को स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर के नागरिक अस्पताल को 100 से बढ़ाकर 200 बेड करने की घोषणा की गई थी। बीते सोमवार को फरीदाबाद में बतौर प्राइम मेडिकल ऑफिसर(पीएमओ) का कार्यभार देख रहे डॉ. सुशील माही का रेवाड़ी स्थानांतरण कर दिया गया था। गुरुवार को सुबह 10 बजे रेवाड़ी पहुंचकर डॉ. माही ने अपना कार्यभार संभाल लिया। ऐसे में गुरुवार से रेवाड़ी नागरिक अस्पताल 200 बेड के अस्पताल में बदल गया। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि पहले से ही स्टाफ व संसाधनों की कमी झेल रहे 100 बेड वाले अस्पताल में पीएमओ की नियुक्ति मात्र से मरीजों को किस तरह से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाएंगी।
200 बेड के लिए जरूरी 110 डॉक्टर व 180 स्टाफ नर्स
स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टर के बाद स्टाफ नर्स नींव होती हैं। लेकिन रेवाड़ी में पहले से ही नींव हिली हुई है। रेवाड़ी में स्टाफ नर्स की 90 पोस्ट प्रस्तावित हैं, लेकिन कार्यरत महज 26 हैं। डॉक्टर की बात करें तो यहां पर 55 मेडिकल ऑफिसर(एमओ) की जरूरत है, लेकिन कार्यरत महज 30 ही हैं। क्योंकि अब अस्पताल 200 बेड का हो चुका है, ऐसे में स्टाफ नर्स की प्रस्तावित पोस्ट बढ़कर 180 व डॉक्टर की 110 हो जाएगी। लेकिन ऐसा कब होगा ये बड़ा सवाल है। ऐसा ही हाल नर्सिंग सिस्टर का है। यहां पर इनके लिए 10 पोस्ट प्रस्तावित है, लेकिन कार्यरत महज दो हैं। ऐसे में 8 पोस्ट खाली होने का खामियाजा यहां पर भर्ती मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
हर रोज ओपीडी 1500 की
शहर के नागरिक अस्पताल में हर रोज औसतन 1500 की ओपीडी होती है। अर्थात नए पुराने करीब 1500 मरीज दवाएं लेकर चले जाते हैं। बीते कुछ माह पहले तक नागरिक अस्पताल में दवाओं की कमी से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी थी। ऐसे में ये मरीज यहां पर खांसी-जुकाम व मौसमी बीमारी के ज्यादा रहते हैं, बड़ी परेशानी होने पर इन्हें रेफर कर दिया जाता है।
ट्रॉमा सेंटर बना रेफरल प्वाइंट
जिला से तीन नेशनल हाईवे- 48, 11 व 71 होकर गुजरते हैं। पटौदी रोड को भी हाईवे में तब्दील करने पर कार्य चल रहा है। ऐसे में सड़क दुर्घटनाओं के हर रोज शहर के ट्रॉमा सेंटर में 10-12 केस पहुंचते हैं। ट्रॉमा सेंटर में व्यवस्थाएं नहीं होने से हर रोज 80 फीसदी घायलों को रेफर कर दिया जाता है। इसका बड़ा कारण यह है कि आज तक ट्रॉमा सेंटर में स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों की ड्यूटी ही ट्रॉमा सेंटर में लगाई जाती है।
नव नियुक्त पीएमओ डॉ. सुशील माही(एमडी मेडिसिन) से स्वास्थ्य सेवाओं पर बातचीत....
200 बेड करने से मरीजों को क्या लाभ मिलेगा..
बेड की संख्या 100 से 200 करने से नागरिक अस्पताल में कैथ लैब जैसी सुविधाओं के साथ डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ बढ़ेगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी।
100 बेड के हिसाब से पूरा स्टाफ ही नहीं अब क्या..
गुरुवार सुबह के समय चार्ज संभाला है। पूरे आंकड़ों को जुटाया जा रहा है। यह बात सही है कि स्टाफ नर्स की कमी बड़ी परेशानी है, उम्मीद है कि जल्द सरकारी ओर से 200 बेड के हिसाब से नियुक्तियां की जाएंगी।
ट्रॉमा सेंटर महज रैफरल प्वाइंट बनकर रह गया है क्यों....
ये सूचना मेरे पास आ चुकी है। ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को कई बार रेफर करना पड़ता है, लेकिन चलन नहीं बनने दिया जाएगा। अब स्पेशलिस्ट डॉक्टर के नोट के बाद ही मरीज को रेफर किया जाएगा। इसके लिए जल्द एडवाइजरी जारी करेंगे। एमओ व स्पेशलिस्ट डॉक्टर मिलकर पहले यहीं पर बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास करेंगे, ऐसा नहीं होने पर ही रेफर किया जाएगा।