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एक फैक्टरी के दो अवैध बोरवेल बंद, पर नहीं मिला शुद्ध पानी

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रेवाड़ी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर सेेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्ल्यू) और प्रदूषण कंट्रोल विभाग ने औद्योगिक क्षेत्र के गांव चिराहाड़ा और उसके आसपास के भूजल दूषित करने वाली एक कंपनी के दो अवैध बोरवेल सील तो कर दिए, लेकिन अभी तक गांव वालों को शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं कराई है। वहीं प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से अभी तक 12 कंपनियों की जांच की गई, लेकिन अभी तक कार्रवाई एक पर भी नहीं हुई। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें औद्योगिक विकास से कोई नुकसान नहीं है, लेकिन बड़ा सवाल है कि जिस तरह से भूजल दूषित किया जा रहा है, आने वाली पीढ़ियों को वह क्या जवाब देंगे। ऐसे में कार्रवाई जरूरी है। ऐसा नहीं हो पाया तो वे दोबारा एनजीटी जाएंगे।
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यहां बता दें कि ग्रामीण रघुनाथ ने एनजीटी में शिकायत देकर कहा गया था कि बावल औद्योगिक क्षेत्र स्थित कुछ कंपनियां अवैध रूप से बोरवेल कर जमीन के अंदर केमिकल युक्त पानी छोड़ रही है। इससे आसपास के गांव का भूजल दूषित हो रहा है। एनजीटी के आदेश पर हुई जांच में ऐसा पाया भी गया। इस पर एनजीटी ने अवैध बोरवेल बंद कर ग्रामीणों को शुद्धपेयजल मुहैया कराने के आदेश दिए थे। इसी के तहत एक कंपनी के दो बोरवेल सील जरूर किए गए, लेकिन यह महज खानापूर्तिं तक ही दिखाई दे रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि जरुरत है ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की।
धारुहेड़ा में हालात चिंता जनक, नोटिस तक कार्रवाई
औद्योगिक इकाईयों से निकले वाले केमिकल युक्त पानी का मामला बावल तक सीमित नहीं है, यह मसला धारुहेड़ा व भिवाड़ी में इससे भी ज्यादा चिंताजनक है। धारुहेड़ा व भिवाड़ी की कंपनियों से निकलने वाला दूषित पानी कुछ औद्योगिक इकाईयों द्वारा बोरवेल कर जमीन के अंदर छोड़ा जा रहा है, वहीं कुछ जगहों पर कई एकड़ में ये गंदा पानी भरा हुआ है। यहां काम मामला भी एनजीटी तक पहुंचा है,श् लेकिन समाधान आज तक नहीं हो पाया है। करीब 15 दिन पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एचएसआईआईडीसी को नोटिस दिया गया था, लेकिन एचएसआईआईडीसी ने हैंडओवर नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद विभाग ने हुडा को नोटिस दिया, लेकिन वहां से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
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जिला में भूजल मानिटरिंग के लिए अधिकारी तक नहीं
मिला भूजल स्तर की मॉनिटरिंग के लिए प्रत्येक जिला में एक जियोलॉजिस्ट होता है। लेकिन रेवाड़ी में कोई अधिकारी तैनात नहीं है। नारनौल स्थित अधिकारी की ओर से मानिटरिंग की खानापूर्ति की जाती है। बताया जा रहा है कि उक्त अधिकारी पर गुरुग्राम का भी चार्ज है, अब ऐसे में एक अधिकारी पर तीन जिलों का चार्ज है तो किस तरह की निगरानी हो पाएगा, समझा जा सकता है। बता दें कि जिला का खोल ब्लॉक पहले ही डार्क जोन में है। हालात अन्य ब्लॉक भी कुछ ज्यादा अच्छे नहीं है। ऐसे में समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
भूजल का टीडीएस 500 के पार
पीने योग्य पानी में टोटल डिजोल्व सॉल्वेंट (टीडीएस) की मात्रा 500 मिलीग्राम प्रतिलीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों का हाल ऐसा है कि टीडीएस की मात्रा 2500-3000 हजार तक है। टीडीएस की अधिकता के कारण ही पानी को खारा या नमकीन कहा जाता है। कुछ जगहों पर भूजल में बैक्टिरिया भी पाया गया है। बीते दिनों शुगर ठीक करने वाले पानी की अफवाह के बाद जांच में यह बात सामने भी आ चुकी है।
रघुनाथ बोले फिर करेंगे एनजीटी से फरियाद
इस संबंध में गांव चिराहड़ा निवासी रघुनाथ सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया । रघुनाथ ने अपनी शिकायत में दूषित पेयजल व भूजल खराब होने के आरोप लगाए थे। एनजीटी ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। रधुनाथ ने बताया कि एक माह भी हालात ज्यों के त्यों है। अगर जल्द ही समाधान नहीं किया गया तो वे एनजीटी कोर्ट में ही अपील करेंगे।
दो बोरवेल किए सील: जियोलॉजिस्ट
सहायक जियोलॉजिस्ट जयपाल ने बताया कि एनजीटी के फैसले बाद एक कंपनी के अंदर चल रहे दो बोरवले सील किए थे। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए एचएसआईआईडीसी को निर्देश दिए गए थे। यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है तो नोटिस दिया जाएगा।
कंपनियों का कर रहे हैं निरीक्षण: आरओ
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी(आरओ) भूपेंद्र सिंह ने कहा कि कंपनियों की जांच की जा रही है। करीब 12 कंपनियों की जांच जा चुकी है। जहां पर भी ऐसा पाया जाता है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक कंपनी पर कार्रवाई कर चुके हैं।
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