अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। हड़ताली रोडवेज कर्मचारियों पर सरकार द्वारा सख्ती के मूड में आने के बाद निकाली गई नई चालक-परिचालक की भर्ती के लिए युवाओं का पहुंचना शुरू हो गया है। हालांकि यह भर्ती दैनिक वेतन पर होने के साथ इसके लिए लगाई गई कड़ी शर्तों के कारण ज्यादातर युवाओं को निराशा हाथ लगी है जिससे रेवाड़ी डिपो में शुक्रवार को पहले दिन 68 ही आवेदन आए हैं। उधर, रोडवेज कर्मचारियों ने भी सरकार से आरपार की लड़ाई का ऐलान करते हुए चेतावनी दी है कि जबतक मांगे नहीं मानी जाएंगी हाड़ताल जारी रहेगी।
दस साल के अनुभव से हुए ज्यादातर
हड़ताल को विफल करने के लिए प्रारंभ की गई भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में युवाओं के बाहर होने की बड़ी वजह यह है कि हैवी लाइसेंस के साथ दस साल का अनुभव मांगा गया है। इतने अधिक अनुभव वाली श्रेणी में युवा चालक बहुत कम संख्या हैं जो पहुंचे रहे हैं वह भी 30 से अधिक उम्र वाले हैं। हालांकि परिचालक के लिए लाइसेंस की योग्यता रखी गई जिससे युवाओं द्वारा रूचि दिखाई गई है। सरकार द्वारा दैनिक वेतन पर भर्ती के बाद भी युवाओं में इसके प्रति दिलचस्पी बढ़ी है और इसके आवेदन के लिए अंतिम तिथि 25 अक्तूबर है। आवेदन प्रक्रिया के दौरान पहले दिन रोडवेज में चालक के लिए 36 व परिचालक के लिए 32 युवाओं ने आवेदन किया है।
युवाओं से बातचीत :
मैंन बीए तक पढ़ाई की है। आज दूसरी बार रोडवेज विभाग में परिचालक की भर्ती देखने आया हूं। बेरोजगार हूं और दैनिक वेतन आधार पर भी नौकरी मिल जाती है तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है।
पवन कुमार, जीतपुरा
मैं कई साल में भर्ती देख रहा हूं। सुबह पता चला है कि रोडवेज विभाग में चालक की भर्ती निकाली है। सूचना मिलते ही मैंने भी आवेदन कर दिया है। अब उम्मीद है कि संभवत: मुझे नौकरी मिल जाए।
भूपेन, नांगल शहबाजपुर
रोडवेज कर्मचारियों द्वारा कोई व्यक्तिश: मांग पर हड़ताल नहीं की जा रही है। सरकार को रोडवेज का बेचने पर तुली हुई है। जब तक निजी बसों के परमिट को रद्द करके रोडवेज बेडे़ में नई बसें शामिल नहीं कर देती, जब लड़ाई जारी रहेगी।
उधमसिंह, रोडवेज प्रधान
10 से अधिक यूनियन के सर्मथन देने के बाद सरकार भी सरकार मांग पूरी नहीं कर रही। रोडवेज की बसों की आय 25 रुपये प्रति किलोमीटर है जबकि सरकार प्राइवेट बसों को 37 से 42 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से अनुबंध पर ले रही है। इससे रोडवेज विभाग को घाटा होगा। सकार को निजी बसों को परमिट देने की बजाय रोडवेज बेडे़ नई बसें शामिल करनी चाहिए।
रवि यादव, रोडवेज प्रधान